

रुद्रपुर। अल्मोड़ा मूल की प्राइमरी शिक्षिका सुषमा पंत की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे जनपद को झकझोर दिया था। अपने ही घर में अधजली अवस्था में मिली इस शिक्षिका की मौत का रहस्य तीन दिन तक पुलिस और जनता दोनों के लिए एक चुनौती बना रहा। लेकिन, ऊधमसिंह नगर पुलिस ने जिस तत्परता और संवेदनशीलता के साथ इस मामले की जांच को दिशा दी, वह सराहनीय है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
काशल्या एनक्लेव फेस-2 सोसायटी के अध्यक्ष सुरेंद्र पाल की तहरीर पर पुलिस ने न केवल मृतका की पीड़ा को गंभीरता से लिया, बल्कि साक्ष्यों के आधार पर मृतका के केयर टेकर अजय मिश्रा और मेड विमला वाल्मीकि के खिलाफ धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने) एवं धारा 108 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। यह धारा समाज में उस वर्ग को संदेश देती है जो दूसरों के मानसिक शोषण और उत्पीड़न को सामान्य समझ लेता है।
मृतका सुषमा पंत ने अपनी जान गंवाने से कुछ दिन पूर्व सोसायटी अध्यक्ष को यह बताया था कि केयरटेकर अजय मिश्रा नशीली दवा देकर उन्हें पागल साबित करने की कोशिश कर रहा है, और मेड विमला उसकी मदद कर रही है। यह बात अब प्रारंभिक जांच में भी स्पष्ट हो गई है।
जैसा कि एसएसपी ऊधमसिंह नगर मणिकांत मिश्रा ने बताया — “प्रारंभिक जांच में केयरटेकर और मेड द्वारा शिक्षिका को प्रताड़ित करने की बात सामने आई है। दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और केयरटेकर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।”

ssi नवीन बुधानी ने बताया कि 28 अक्टूबर को कौशल्या कालोनी निवासी सुषमा पंत का शव संदिग्ध परिस्थितियों में उसके घर से अधजली अवस्था में बिस्तर पर पड़ा पाया गया था। उसकी माता द्वारा रुद्रपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था जिसमें आरोपी अजय शंकर मिश्रा पुत्र स्वर्गीय राजमणि मिश्रा, उम्र 58 वर्ष, मूल निवासी ग्राम पनदहां, थाना नेहनगर, जनपद आजमगढ़, उत्तर प्रदेश और वर्तमान निवासी कौशल्या एनक्लेव फेस टू, गली नंबर 3, बगवाड़ा व नौकरानी विमला वाल्मीकि पर पुत्री को आत्मदाह करने के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने बताया कि मामले पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी केयर टेकर अजय शंकर मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया।
रुद्रपुर
यह पुलिस की वह दक्षता है जो समाज में न्याय व्यवस्था पर विश्वास कायम करती है। जहां एक ओर मैंने, अवतार सिंह बिष्ट ने 8 नवंबर को इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी थी, वहीं यह स्वीकार करना भी उतना ही आवश्यक है कि पुलिस ने समय रहते त्वरित कार्रवाई कर अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया है।
इस केस में एक और नाम उल्लेखनीय है — ललित बिष्ट, जिन्होंने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए मृतका का अंतिम संस्कार कराया। यह कार्य मानवता की मिसाल है और समाज में ऐसे संवेदनशील नागरिकों की भूमिका को भी रेखांकित करता है जो कठिन समय में आगे आते हैं।
कौशल्या एनक्लेव फेस-2 जैसी प्रतिष्ठित कॉलोनी में शिक्षिका की अधजली लाश मिलना एक भयावह संकेत था कि सभ्य समाज में भी घरेलू हिंसा और मानसिक उत्पीड़न का जहर गहराई तक पहुंच चुका है। लेकिन पुलिस की सजगता और त्वरित प्रतिक्रिया ने यह दिखा दिया कि कानून का हाथ कितना मजबूत और निष्पक्ष हो सकता है, बशर्ते इरादे सच्चे हों।
आज जब समाज में संवेदनाओं का ह्रास और अपराधों के प्रति असंवेदनशीलता बढ़ रही है, ऐसे में ऊधमसिंह नगर पुलिस की यह कार्रवाई एक मिसाल है। उम्मीद की जानी चाहिए कि आगे की विवेचना में सुषमा पंत को पूर्ण न्याय मिलेगा और यह मामला उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा बनेगा जो किसी भी प्रकार की प्रताड़ना झेल रही हैं।
अंततः, यह कहना उचित होगा कि न्याय देर से ही सही, परंतु जब समाज और पुलिस दोनों संवेदनशील हों तो न्याय अवश्य मिलता है — और ऊधमसिंह नगर पुलिस की यह कार्रवाई उसी दिशा में एक सशक्त कदम है।




