

मूल्यों, संस्कृति और परंपराओं की पिच पर विपक्ष कभी मोदी को नहीं हरा पाएगा
भारत का राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, लेकिन एक सत्य आज भी अडिग खड़ा है — भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्य और राष्ट्रीय अस्मिता की पिच पर नरेंद्र मोदी और भाजपा को कोई चुनौती नहीं दे सकता। विपक्ष जितना इस पिच पर उतरकर चुनौती देने की कोशिश करता है, उतनी ही करारी चुनावी हार उसके हिस्से आती है। कारण स्पष्ट है — विपक्ष भारतीय मानस को समझे बिना लड़ाई लड़ रहा है, वहीं मोदी ठीक वहीं वार करते हैं जहाँ भारत का मन, आत्मा और भाव बसते हैं।

संपादकीय: मूल्यों, संस्कृति और परंपराओं की पिच पर विपक्ष कभी मोदी को नहीं हरा पाएगा!! बिहार विधानसभा चुनाव
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
https://hindustanglobaltimes.com/uttarakhand/editorial-opposition-will-never-be-able-to-defeat-modi-on-the-pitch-of-values-culture-and-traditions-bihar-assembly-elections/
विपक्ष की सबसे बड़ी भूल यह है कि वह हिंदुत्व को गाली देकर चुनाव जीतने का सपना देखता है, भारतीय सेना के शौर्य को चुनौती देकर सत्ता पाने का भ्रम पालता है और जाति के नाम पर समाज को तोड़कर जनादेश पाने की उम्मीद करता है। परंतु यह देश अब बदल चुका है — धर्म और राष्ट्र का अनादर कर सत्ता प्राप्त करना अब असंभव है।
महिलाओं और युवा मतदाताओं की शांति भरी लेकिन निर्णायक क्रांति
बिहार विधानसभा चुनावों ने साफ़ संदेश दिया है कि —
महिलाओं ने मोदी गारंटी पर भरोसा व्यक्त किया है, और
Gen-Z जिसे विपक्ष भड़काने की कोशिश कर रहा था, उसने NDA को अपार समर्थन देकर अपने निर्णय और परिपक्वता का परिचय दिया है।
यह मतदाता अब भावनात्मक बहकावे में नहीं आता; वह योजनाओं का लाभ, भ्रष्टाचार-मुक्त शासन और राष्ट्रीय सुरक्षा का मूल्य समझता है। DBT से सीधा लाभ, हर वर्ग का प्रतिनिधित्व और दृढ़ नेतृत्व — यही मोदी की सबसे बड़ी पूंजी है।
विपक्ष की नीयत पर जनता का अविश्वास
जनता विपक्ष के व्यवहार को बहुत ध्यान से देखती है।
संसद का लगातार बाधित होना, अराजकता फैलाने की कोशिश, संवैधानिक संस्थाओं पर प्रश्नचिह्न, विदेशी मंचों पर भारत के लोकतंत्र पर हमला — इन सबने विपक्ष का चरित्र जनता के सामने साफ कर दिया है।
विशेषकर हिंदू प्रतीकों के अपमान, श्रीराम मंदिर और छठ पूजा पर विरोधी बयानों, लव जिहाद-कन्वर्ज़न पर मौन और वक्फ़ कानूनों के समर्थन ने जनता को और सतर्क कर दिया है।
लोगों ने प्रश्न किया — जो संस्कृति का सम्मान नहीं कर सकता, वह जनता का सम्मान क्या करेगा?
परिवारवाद, तुष्टिकरण और भ्रमजाल का अंत
भारत की जनता अब वंशवाद का चोला पहनकर राजनीति करने वालों के साथ नहीं खड़ी।
राहुल-प्रियंका, लालू-तेजस्वी, अखिलेश-यादव, तमाम वंशवादी धड़े — सभी इस चुनाव में जनता की नजरों से कटघरे में खड़े दिखे।
विपक्ष जिस “पैटर्न” पर खेल रहा था —
- मोदी विरोध को भारत विरोध बना देना,
- समाज के मन में विभाजन के बीज बोना,
- धार्मिक पहचान के आधारित ध्रुवीकरण,
- यूट्यूबर पत्रकारों से कृत्रिम माहौल बनवाना —
वह पूरी तरह विफल हो गया।
क्योंकि जनता अब भावनात्मक नहीं, तथ्यपरक निर्णय ले रही है।
वह अब न तो “EVM हैक” जैसी कहानियों से प्रभावित होती है, न “वोट चोरी” का रोना सुनकर विश्वास करती है।
2024 के बाद हरियाणा, महाराष्ट्र और बिहार — एक राष्ट्रीय संकेत
इन जीतों को केवल राजनीतिक जीत मानना भूल होगी।
यह परिणाम बताते हैं कि —
जनता जान चुकी है कि देश की बागडोर सुरक्षित हाथों में किसके पास है।
जब वैश्विक शक्तियाँ भारत को कमजोर करने की साज़िश रचती हैं, मोदी को हटाने की रणनीति बनाई जाती है, तब एक अदृश्य शक्ति जनता के भीतर संचारित होती है — और वह मोदी को और भी मज़बूती से सत्ता सौंप देती है।
भारत की सदी लिखी जा चुकी है और इसकी दिशा तय कर रहा है —
आत्मविश्वासी भारत, अस्मिता से जुड़ा भारत, विश्वास से भरा भारत।
अब विपक्ष को आत्ममंथन करना होगा।
जनादेश का अपमान, जनता को दोषी ठहराना या लोकतंत्र को कटघरे में खड़ा करना — यह वही पुरानी राजनीति है जिसे जनता दफना चुकी है।
यदि विपक्ष अब भी नहीं समझा तो इतिहास उसे वहीं फेंक देगा जहाँ विचारहीन, उद्देश्यहीन और नकारात्मक राजनीति का अंत होता है — राजनीतिक रसातल।
✍️ अवतार सिंह बिष्ट
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर
(उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी)




