रुद्रपुर से रमज़ान तक: दुनिया भर में डर के साये में ईद, आधी नमाज़ और पूरा सवाल

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उत्तराखंड ईद-उल-फितर, जो आमतौर पर खुशियों, मेल-मिलाप और इबादत का प्रतीक होता है, इस बार दुनिया के कई हिस्सों में खौफ, तनाव और प्रतिबंधों के बीच मनाया गया। मध्य-पूर्व से लेकर दक्षिण एशिया और उत्तराखंड के रुद्रपुर तक—हर जगह हालात ने इस पवित्र त्योहार की रौनक को फीका कर दिया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


वैश्विक परिदृश्य: जब ईद पर छाया युद्ध और डर
इस वर्ष ईद के मौके पर अल-अक्सा मस्जिद जैसे पवित्र स्थल भी वीरान दिखाई दिए। इजरायल द्वारा सुरक्षा कारणों से लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बना दिया।
दुबई जैसे शहर, जो अपनी भव्य ईद के लिए जाने जाते हैं, इस बार सूने पड़े रहे। संयुक्त अरब अमीरात, कतर और कुवैत में खुले में नमाज़ पर पाबंदियां लगाई गईं—डर था कि कहीं कोई मिसाइल हमला न हो जाए।
इराक में शिया समुदाय ने अली खामेनेई को श्रद्धांजलि दी, जबकि गाजा और लेबनान में विस्थापित लोग शेल्टर में ईद मनाने को मजबूर रहे।
⚔️ युद्ध और तनाव: रमज़ान भी रहा खून-खराबे के नाम
रमज़ान का महीना, जो आत्मशुद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है, इस बार संघर्षों में उलझा रहा। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हिंसा, और अस्पताल पर हमले जैसी घटनाओं ने स्थिति को और भयावह बना दिया।
हालांकि तुर्किए, सऊदी अरब और कतर की मध्यस्थता के बाद दोनों देशों ने ईद के दौरान अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई—लेकिन डर का साया बना रहा।
रुद्रपुर: आधी ज़मीन, पूरी आस्था
जहां दुनिया युद्ध और आतंक के साये में ईद मना रही थी, वहीं रुद्रपुर में भी हालात अलग नहीं थे—बस वजहें स्थानीय थीं।
नगर निगम द्वारा ईदगाह की भूमि पर चारदीवारी खड़ी कर दी गई, जिस पर नजूल भूमि कब्जे का आरोप लगा। परिणाम यह हुआ कि मुस्लिम समाज को आधे हिस्से में ही नमाज़ अदा करनी पड़ी। विरोध स्वरूप लोगों ने काली पट्टी बांधकर नमाज़ पढ़ी—जो एक मौन संदेश था।
विकास शर्मा, महापौर ने स्पष्ट कहा कि सरकारी भूमि पर नमाज़ नहीं पढ़ी जाएगी, जबकि मुस्लिम समाज ने इसे धार्मिक अधिकारों पर अतिक्रमण बताया।

सीमाएं अलग, हालात एक
रुद्रपुर की आधी नमाज़ हो या मध्य पूर्व की वीरान मस्जिदें—संदेश एक ही है:
आज मुसलमानों की स्थिति, चाहे वह स्थानीय विवाद हो या वैश्विक युद्ध, एक अनिश्चितता और दबाव से भरी हुई है।
जहां एक ओर सरकारें सुरक्षा और कानून का हवाला दे रही हैं, वहीं आम लोग अपने धार्मिक अधिकारों और अस्तित्व को लेकर चिंतित हैं।

रुद्रपुर में इस बार ईद सादगी और विरोध के साथ मनाई गई। लोगों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर एकजुटता और चिंता का संदेश दिया। नमाज के बाद अमन-चैन की दुआ की गई और हालात सुधारने की अपील की गई।
ईद, जो एकता और भाईचारे का प्रतीक है, इस बार सवालों के घेरे में है—

महापौर विकास शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि धर्म की आड़ में सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम उच्च न्यायालय के आदेशों का पूरी तरह पालन कर रहा है और कानून से ऊपर कोई नहीं है। शर्मा ने यह भी कहा कि प्रशासन सभी वर्गों की भावनाओं का सम्मान करता है, लेकिन सार्वजनिक भूमि का उपयोग नियमों के अनुसार ही होगा। उन्होंने लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी विवाद का समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किया जाएगा।


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