

आस्था की पदयात्रा और समाज की ऊर्जा
रुद्रपुर। शहर से पैदल निशान लेकर राजस्थान स्थित खाटू श्याम मंदिर तक की कठिन यात्रा पूरी कर लौटे श्याम प्रेमी राकेश शर्मा का रुद्रपुर आगमन श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत दृश्य बन गया। जयकारों की गूंज,

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
अबीर-गुलाल की रंगत और फूलों की वर्षा के बीच उनका स्वागत केवल एक व्यक्ति का अभिनंदन नहीं था, बल्कि आस्था की उस परंपरा का सम्मान था जो भारतीय समाज को भीतर से जोड़ती है।
धार्मिक पदयात्राएं भारतीय संस्कृति की प्राचीन विरासत रही हैं। जब कोई श्रद्धालु सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पैदल तय करता है, तो वह केवल भौगोलिक दूरी नहीं नापता, बल्कि अपनी आस्था, धैर्य और आत्मबल की परीक्षा भी देता है। राकेश शर्मा की यह पैदल निशान यात्रा उसी अटूट विश्वास का उदाहरण है, जिसमें कठिनाइयाँ भी भक्ति के सामने छोटी पड़ जाती हैं।
इस अवसर पर पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने भी उनका माला पहनाकर स्वागत किया और सकुशल यात्रा पूर्ण करने पर बधाई दी। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि इतनी लंबी दूरी पैदल तय करना साधारण बात नहीं है। यह आस्था और समर्पण का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करते हैं। उनका यह कथन विचारणीय है कि जब समाज आस्था के सूत्र में बंधता है, तो उसमें आपसी सहयोग और सद्भाव स्वतः बढ़ता है।
वास्तव में, खाटू श्याम की पदयात्राएं केवल व्यक्तिगत श्रद्धा का विषय नहीं रह जातीं। रास्ते में मिलने वाला सहयोग, जगह-जगह होने वाली सेवा, और वापसी पर होने वाला सामूहिक स्वागत – यह सब सामाजिक ऊर्जा का परिचायक है। रुद्रपुर में हुआ यह स्वागत समारोह भी इसी सामाजिक समरसता का प्रतीक बना, जहां विभिन्न वर्गों और आयु के लोगों ने एक साथ मिलकर श्रद्धा का उत्सव मनाया।
राकेश शर्मा ने भी इस स्नेह से अभिभूत होकर कहा कि बाबा श्याम की कृपा से ही कठिन यात्रा सुगम हो सकी। उनके शब्दों में विनम्रता और कृतज्ञता स्पष्ट झलक रही थी। यह भाव ही भक्ति की असली पहचान है – जहां उपलब्धि का श्रेय स्वयं को नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा और समाज के प्रेम को दिया जाता है।
स्वागत समारोह में विनीत जैन, विकास जैन, संजय ठुकराल, प्रियांशु, राजेश गर्ग, सुरेन्द्र गुप्ता, अनुज गंगवार, राम किशन शर्मा, हिमांशु पारिक, हिमांशु शर्मा, नरेन्द्र बंसल, मुकेश गोयल, रितिक गोयल, सुमन कालड़ा, प्रवीन गोयल, संजीव गुप्ता, प्रियांशु वर्मा, आकाश, नरेन्द्र रावत, आशीष गंभीर, सुरेन्द्र गंगवार, विमल सागर, दुर्गेश सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति इस बात का संकेत थी कि धार्मिक आस्था आज भी समाज को जोड़ने की क्षमता रखती है।
आज जब समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों और विभाजनों का सामना कर रहा है, ऐसे में आस्था से प्रेरित सकारात्मक आयोजन सामूहिक चेतना को सशक्त करते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि धार्मिक ऊर्जा केवल उत्सव तक सीमित न रहे, बल्कि उसे सेवा, सद्भाव और सामाजिक जिम्मेदारी की दिशा में भी रूपांतरित किया जाए।
राकेश शर्मा की यह पदयात्रा निश्चय ही व्यक्तिगत श्रद्धा का विषय है, लेकिन उससे उत्पन्न सामूहिक प्रेरणा समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है – कि विश्वास, धैर्य और समर्पण से कठिन से कठिन मार्ग भी पार किया जा सकता है।




