रुद्रपुर से बिहार तक—शिव अरोड़ा बन रहे भाजपा के नए “चुनावी रणनीतिकार”(विशेष संपादकीय रिपोर्ट : अवतार सिंह बिष्ट, हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स)

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बिहार विधानसभा चुनाव के बीच भाजपा प्रत्याशी श्रीमती रमा निषाद के समर्थन में डीहवार मंडल में चुनावी कार्यालय का शुभारंभ हुआ, जहां प्रत्याशी पति व पूर्व सांसद श्री अजय निषाद तथा विस्तारक श्री सुनील शुक्ला की उपस्थिति ने कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया। “रफ़्तार पकड़ चुका है बिहार, फिर से एनडीए सरकार” — इस नारे के साथ पूरे क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान को धार दी जा रही है।

इस अभियान की रणनीति में एक नाम विशेष रूप से सुर्खियों में है — उत्तराखंड के रुद्रपुर विधायक शिव अरोड़ा।
भाजपा नेतृत्व ने उन्हें बिहार चुनाव में एक प्रमुख रणनीतिक जिम्मेदारी सौंपी है। बताया जा रहा है कि अरोड़ा को जिस विधानसभा क्षेत्र की चुनावी बागडोर दी गई है, वहां बूथ प्रबंधन से लेकर मतदाता संवाद तक की पूरी योजना उन्हीं के निर्देशन में संचालित हो रही है।

शिव अरोड़ा का यह राजनीतिक विस्तार केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहा। रुद्रपुर में जिस कुशलता से उन्होंने संगठन, चुनाव प्रबंधन और जनसंपर्क को संयोजित किया, उसी कौशल ने अब उन्हें बिहार में भी भाजपा की जीत का सूत्रधार बना दिया है। यह पहली बार है जब उत्तराखंड का कोई विधायक भाजपा के लिए किसी अन्य राज्य में इतनी महत्वपूर्ण रणनीतिक भूमिका निभा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अरोड़ा की विशेषता उनका “मैदान से जुड़ाव” और “संगठन के सूक्ष्म संचालन” का अनुभव है। उन्होंने उत्तराखंड में अपने कार्यकाल के दौरान देखा कि किस तरह जनता के बीच विश्वास कायम कर, स्थानीय मुद्दों को सीधे नेतृत्व तक पहुंचाकर चुनावी समीकरणों को साधा जा सकता है। यही मॉडल अब बिहार में भी आजमाया जा रहा है।

भाजपा के सूत्रों के अनुसार, अरोड़ा ने प्रत्याशी रमा निषाद के क्षेत्र में प्रत्येक पंचायत और शक्तिकेंद्र अध्यक्षों के माध्यम से “बूथ बस्ता वितरण” और “मतदाता संपर्क व्यवस्था” को सुनिश्चित कराया है। उनके निर्देशन में कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि इस चुनाव में हर बूथ, हर मतदाता और हर कार्यकर्ता भाजपा की जीत का प्रहरी बने।

जानकारों के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व अरोड़ा की कार्यशैली को लेकर खासा संतुष्ट है। उनकी संगठनात्मक समझ और चुनावी बारीकियों पर पकड़ ने उन्हें एक उभरते हुए राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में स्थापित कर दिया है। यह भी चर्चा है कि आने वाले समय में भाजपा उन्हें केंद्र की राजनीति में कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है।

रुद्रपुर में उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत भी किसी साधारण पथ से नहीं हुई थी — संगठन में धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए उन्होंने विधायक का टिकट भी अपने दम पर प्राप्त किया, और चुनाव जीतकर यह साबित किया कि राजनीति में रणनीति ही असली शक्ति है।

बिहार में भाजपा प्रत्याशी रमा निषाद के पक्ष में जिस तरह से माहौल बन रहा है, उससे यह माना जा रहा है कि शिव अरोड़ा की रणनीति ने स्थानीय समीकरणों को भाजपा के पक्ष में मोड़ दिया है। यही कारण है कि बिहार में अब कई जिलों के कार्यकर्ता यह मांग उठा रहे हैं कि “हमारे क्षेत्र में भी उत्तराखंड वाले शिव अरोड़ा जी जैसे रणनीतिकार को भेजा जाए।”

राजनीति में कहा जाता है — “चुनाव जीतना नेतृत्व की क्षमता का प्रमाण होता है, लेकिन जीत का रास्ता रणनीति तय करती है।”
और आज बिहार के चुनावी मैदान में यह रणनीति लिख रहे हैं रुद्रपुर के विधायक शिव अरोड़ा, जिनका राजनीतिक ग्राफ अब केवल उत्तराखंड नहीं, बल्कि राष्ट्रीय क्षितिज पर भी तेजी से उभर रहा है।


बिहार के इस चुनावी परिदृश्य में जहां एनडीए “फिर से सरकार” के नारे के साथ जनता के बीच जा रही है, वहीं पर्दे के पीछे रणनीति की कमान संभाले शिव अरोड़ा जैसे युवा और प्रखर नेताओं की भूमिका ही आने वाले परिणामों का असली आधार बनेगी।
रुद्रपुर से उठी यह रणनीतिक लहर अब बिहार की राजनीति में भाजपा की “जीत की आंधी” में बदलती दिखाई दे रही है।



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