पॉलीहाउस योजना में गड़बड़ी पर एक्शन: शिवसेना के आंदोलन और मीडिया दबाव के बाद शासन हरकत में

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रुद्रपुर,अल्मोड़ा/देहरादून।जनपद में पॉलीहाउस (Naturally Ventilated) योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर आखिरकार शासन को कार्रवाई करनी पड़ी है। 07 अप्रैल 2026 को जारी आदेश को शिवसेना के धरातलीय आंदोलन और हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित खबरों का सीधा असर माना जा रहा है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)ए


दरअसल, इस पूरे मामले को सबसे पहले शिवसेना ने गंभीरता से उठाया। संगठन द्वारा क्रमबद्ध तरीके से इस मुद्दे को प्रशासन और शासन के सामने रखा गया। शिवसेना पदाधिकारियों ने पहले कुमाऊं आयुक्त को पत्र प्रेषित कर योजना में गड़बड़ियों की शिकायत की। इसके बाद मीडिया के माध्यम से मामले को प्रमुखता से उठाया गया, जिससे यह मुद्दा जनचर्चा में आया।
शिवसेना ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत योजना से जुड़ी पूरी जानकारी प्राप्त की और तथ्यों के आधार पर किसानों को एकजुट किया। 2 अप्रैल को बड़ी संख्या में किसानों को साथ लेकर उद्यान निदेशक कार्यालय में अधिकारियों का घेराव किया गया। इस दौरान जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ और योजना में पारदर्शिता की मांग उठाई गई।

शिवसेना की भूमिका :पॉलीहाउस योजना में अनियमितताओं को लेकर शिवसेना ने शुरू से ही आक्रामक और संगठित भूमिका निभाई। कुमाऊं मंडल संयोजक पुरानचंद भट्ट ने न केवल कुमाऊं आयुक्त को पत्र भेजकर मामले को उठाया, बल्कि धरना-प्रदर्शन की तिथि घोषित कर प्रशासन को चेतावनी भी दी। इसके बाद सूचना के अधिकार के तहत तथ्य जुटाकर किसानों को जागरूक किया गया और 2 अप्रैल को उद्यान निदेशक कार्यालय में घेराव कर दबाव बनाया गया। लगातार मीडिया में मुद्दा उठाने से शासन को कार्रवाई करनी पड़ी। यह आंदोलन शिवसेना की जमीनी सक्रियता और किसानों के हित में संघर्ष का उदाहरण बना।


आंदोलन और लगातार मीडिया कवरेज के दबाव में प्रशासन को अंततः लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक करनी पड़ी और 10 अप्रैल तक आपत्तियां आमंत्रित करने का आदेश जारी किया गया।
धरातल पर सक्रियता का दावा
शिवसेना ने इसे अपनी बड़ी जीत बताते हुए कहा कि यह संगठन के जमीनी संघर्ष का परिणाम है। पदाधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते आवाज न उठाई जाती तो अपात्र लोगों को योजना का लाभ मिल जाता और वास्तविक किसान वंचित रह जाते।
मीडिया की भूमिका भी अहम
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित खबरों ने इस मुद्दे को प्रशासनिक गलियारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगातार खबरें छपने से अधिकारियों पर कार्रवाई का दबाव बना।
अब किसानों की नजर कार्रवाई पर
फिलहाल किसानों को 10 अप्रैल तक आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया गया है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद कितनी पारदर्शिता के साथ सूची में संशोधन होता है और क्या वास्तव में पात्र किसानों को योजना का लाभ मिल पाता है या नहीं।

पॉलीहाउस योजना का यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि जब जनसंगठन और मीडिया मिलकर आवाज उठाते हैं, तो शासन को भी निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है।


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