

गुरुग्राम में आयोजित “सचेतना तृतीय वार्षिकोत्सव- सनातन साहित्य सम्मान एवं समागम” के ऐतिहासिक अवसर पर साहित्यिक जगत को एक महत्वपूर्ण दार्शनिक कृति प्राप्त हुई। साहित्यिक सचेतना मंच के संस्थापक एवं मार्गदर्शक गुरुदेव नरेंद्र रावत ‘नरेन’ द्वारा रचित प्रथम ग्रंथ “सृष्टिदर्शन” का भव्य एवं गरिमामय विमोचन देशभर से आए साहित्यकारों, चिंतकों और विद्वानों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
यह ग्रंथ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि सनातन दर्शन, अद्वैत चिंतन और चेतना-विज्ञान का गहन समन्वय प्रस्तुत करता है। “सृष्टिदर्शन” में वेद, उपनिषद और गीता के सिद्धांतों के आधार पर सृष्टि, आत्मा और मानव जीवन के रहस्यों को सरल एवं तार्किक भाषा में प्रस्तुत किया गया है। विशेष रूप से “ॐ तत् सत्” के वैदिक रहस्य के माध्यम से आत्मा, प्राण, प्रकृति और पदार्थ के चार आयामों तथा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के पुरुषार्थों का विश्लेषण इसे समकालीन संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक बनाता है।
अपने उद्बोधन में गुरुदेव नरेंद्र रावत ‘नरेन’ ने स्पष्ट किया कि यह कृति केवल ज्ञान का संकलन नहीं, बल्कि चेतना के जागरण का एक प्रयास है, जो व्यक्ति को स्वयं से जोड़कर उसे व्यापक अस्तित्व से एकत्व का अनुभव कराती है। उन्होंने सनातन दर्शन को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों एवं विद्वानों ने “सृष्टिदर्शन” को एक युगदर्शी कृति बताते हुए इसकी मुक्त कंठ से सराहना की और इसे भविष्य में वैचारिक जागरण का आधार स्तंभ बताया।
इस अवसर पर कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पदाधिकारियों में प्रीति डिमरी ‘प्रीत’ (राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संपादिका), देवेंद्र राघव ‘देव’ (प्रदेश प्रभारी, हरियाणा एवं कार्यक्रम संयोजक) तथा योगेश गहतोड़ी ‘यश’ (राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी) का विशेष योगदान रहा।
अंत में पाठकों से अपील की गई कि वे इस महत्वपूर्ण ग्रंथ का अध्ययन कर अमेज़ॉन पर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य साझा करें, जिससे यह कृति अधिकाधिक लोगों तक पहुँच सके और सनातन साहित्य के इस प्रयास को व्यापक जनसमर्थन मिल सके।




