

होली केवल रंगों का उत्सव हृदयों के मिलन का अवसर है। ऐसे समय में जब समाज अनेक चुनौतियों और व्यस्तताओं के बीच बंटता सा दिखता है, तब सामूहिक उत्सव हमें फिर से एक सूत्र में पिरोने का कार्य करते हैं। 1 मार्च, रविवार सायं 6:00 बजे स्वर्णिम हिल व्यू सिटी स्थित निवास पर आयोजित महिलाओं व पुरुषों की होली इसी सामाजिक समरसता का सुंदर उदाहरण है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
श्री राजेंद्र सिंह बोहरा एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती किरण बोरा द्वारा आयोजित यह होली मिलन केवल एक पारिवारिक आयोजन , रुद्रपुर के पर्वतीय समाज को एक मंच पर लाने का स्नेहिल प्रयास है। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक जड़ों को सींचते हैं, आपसी संवाद को प्रगाढ़ बनाते हैं और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं।
आज जब पर्वों का स्वरूप औपचारिक होता जा रहा है, तब इस प्रकार का आत्मीय आमंत्रण सामाजिक सौहार्द का जीवंत संदेश देता है। होली का रंग तभी सार्थक है जब उसमें अपनापन, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति विश्वास घुला हो। बोहरा दंपति का यह प्रयास निश्चित ही समाज में सकारात्मक ऊर्जा और पारस्परिक भाईचारे को सुदृढ़ करेगा।
जय पूरे रुद्रपुर पर्वतीय समाज की ओर से श्री राजेंद्र सिंह बोहरा एवं श्रीमती किरण बोरा को हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर से प्रार्थना है कि उनके जीवन में सदैव प्रेम, समृद्धि और सामाजिक सेवा का रंग यूँ ही घुलता रहे, और उनका यह स्नेहिल आंगन सदैव हंसी-खुशी और सांस्कृतिक एकता का केंद्र बना रहे।
होली मंगलमय हो, समाज संगठित हो, और रिश्तों के रंग कभी फीके न पड़ें।
अरे खेलैं होली स्वर्णिम आंगन मा,
रंग छलकैं हिल व्यू सिटी मा।
ढोल दमाऊं बाजैं छन-छन,
हँसी गूंजैं हर इक गली मा।
आज बोहरा जी कै द्वार खुला,
रंगों की बरसात भली मा।
राजेंद्र सिंह जी अगुवाई करें,
मिलन की छाँव तली मा।
किरण बोरा संग रंग घुलैं,
फूल जैं मुस्कान खिली मा।
नारी-नर सब एक संग नाचैं,
होली आई खुशी भरी मा।
अबीर गुलाल उड़ै गगन मा,
ढलती साँझ सुनहरी ली मा।
“फागुन आयो रे” सब गाबैं,
मस्ती छाई हर दिली मा।
पर्वत की ठंडी बयार बहे,
रंग तपै मन की कली मा।
बैठक जमे, चौक सजे,
मीठी बोली हर बोली मा।
“हो रामा, खेलैं होली मिल-जुल,
रूठा कोई न रह जली मा।”
राजेंद्र-किरण दंपति संग,
प्रेम बरसै हर कली मा।
जय हो रुद्रपुर पर्वतीय समाज की,
एकता रँग दी हर डाली मा।
ऐसी होली हर बरस खिलै,
स्नेह बसै हर खाली मा। 🌸🎶




