

माननीय उमेश कुमार जी (निर्दलीय विधायक, खानपुर),
आपका हालिया वायरल बयान एक गंभीर दोहरे चरित्र को उजागर करता है। विधानसभा में गैरसैंण–स्थायी राजधानी पर भावुक भाषण देने वाले उमेश कुमार, जब अंकिता भंडारी जैसे जघन्य हत्याकांड की बात आती है, तो पीड़ित नहीं बल्कि सत्ता और संदिग्धों के बचाव में खड़े दिखते हैं। सवाल यह नहीं कि कोई महिला कब बोल रही है, सवाल यह है कि जब वह सबूतों के साथ बोल रही है तो उसे कटघरे में क्यों खड़ा किया जा रहा है?
यदि किसी महिला ने भय, दबाव और परिस्थितियों के बावजूद सच उजागर करने की हिम्मत की है, तो उसे संदेह नहीं, सम्मान मिलना चाहिए। आपका यह कहना कि “ऑडियो पहले क्यों नहीं वायरल किया गया” न्याय नहीं, बल्कि गुनहगारों को राहत देने जैसा है। उत्तराखंड की बेटी के पक्ष में खड़े होने के बजाय आरोप लगाने वाली महिलाओं पर सवाल उठाना आपकी कथनी–करनी के विरोधाभास को उजागर करता है।
न्याय में देरी पर बहस हो सकती है, जांच से डर नहीं।





