

यह स्कैम खास तौर पर टूरिस्ट जगहों पर तेजी से फैल रहा है. इसमें टैप-टू-पे यानी NFC टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, जो कार्ड और स्मार्टफोन दोनों में मौजूद होती है. स्कैमर्स भीड़-भाड़ वाली जगहों जैसे एयरपोर्ट, त्योहारों और व्यस्त बाजारों में यात्रियों को निशाना बनाकर उनके अकाउंट से पैसे निकालने की कोशिश कर रहे हैं.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड)
क्या है ‘घोस्ट टैपिंग’ स्कैम?
जैसे-जैसे कॉन्टैक्टलेस पेमेंट लोकप्रिय हुआ है, वैसे-वैसे स्कैमर्स ने भी इसका फायदा उठाने के तरीके खोज लिए हैं. घोस्ट टैपिंग एक ऐसा तरीका है, जिसमें फ्रॉड करने वाला व्यक्ति NFC-enabled डिवाइस की मदद से बिना बताए आपके कार्ड या फोन से पेमेंट ट्रिगर कर देता है. इसमें न तो कार्ड की डिटेल डालने की जरूरत होती है और न ही OTP की. अगर आपके कार्ड या स्मार्टफोन में टैप-टू-पे ऑन है, तो स्कैमर आपके पास खड़े होकर ही ट्रांजैक्शन शुरू कर सकता है.
यह स्कैम कैसे काम करता है?
घोस्ट टैपिंग पूरी तरह Near Field Communication यानी NFC टेक्नोलॉजी पर आधारित है, जो Apple Pay, Google Pay, Samsung Wallet और कॉन्टैक्टलेस कार्ड्स में इस्तेमाल होती है. स्कैमर्स अपने साथ पोर्टेबल NFC रीडर या मॉडिफाइड स्मार्टफोन रखते हैं. वे ऐसे टूरिस्ट स्पॉट्स पर मौजूद रहते हैं, जहां भीड़ ज्यादा होती है. कई बार नकली दुकानदार छोटे भुगतान के लिए टैप-टू-पे करने को कहते हैं. इस दौरान या तो आपके अकाउंट से दिखाई गई रकम से ज्यादा पैसे कट जाते हैं या फिर आपको पता ही नहीं चलता कि ट्रांजैक्शन हो चुका है. इस स्कैम की खास बात यह है कि स्कैमर को कुछ सेकंड तक आपके बहुत पास रहना पड़ता है.
किन जगहों पर सबसे ज्यादा मामले सामने आए?
हालांकि अभी तक किसी देश के लिए आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं हुए हैं, लेकिन साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह स्कैम हाई-टूरिज्म इलाकों में तेजी से बढ़ रहा है. अमेरिका में बड़े इवेंट्स और फेस्टिवल्स के दौरान, ब्रिटेन और पश्चिमी यूरोप के कुछ हिस्सों में, फ्रांस, स्पेन, इटली, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों में इसके मामले सामने आ रहे हैं. इसके अलावा इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स और ट्रांजिट हब्स भी स्कैमर्स के पसंदीदा ठिकाने बन रहे हैं.
यात्री आसान शिकार क्यों बनते हैं?
यात्रा के दौरान, खासकर विदेश में, लोग जल्दी भुगतान करने के लिए टैप-टू-पे पर ज्यादा भरोसा करते हैं. भीड़-भाड़ वाली जगहों पर सतर्कता कम हो जाती है. कई बार ट्रैवलर्स तुरंत बैंक अलर्ट चेक नहीं करते. नकली दुकानदार भी बाजारों और इवेंट्स में आसानी से घुल-मिल जाते हैं. ऊपर से विदेशी करेंसी की कन्फ्यूजन में ज्यादा चार्ज होने का एहसास देर से होता है.
यात्रा के दौरान खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
अगर आप अगली इंटरनेशनल ट्रिप की प्लानिंग कर रहे हैं, तो सावधानी बेहद जरूरी है. जब NFC की जरूरत न हो, तो स्मार्टफोन में इसे बंद रखें. RFID-ब्लॉकिंग वॉलेट या कार्ड स्लीव का इस्तेमाल करें, जिससे कार्ड से सिग्नल बाहर न जाए. बिना पहचान वाले स्टॉल्स या सड़क किनारे दुकानों पर टैप-टू-पे से बचें. अपने बैंक ऐप में इंस्टेंट ट्रांजैक्शन अलर्ट ऑन रखें. मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल करते समय बायोमेट्रिक सिक्योरिटी जैसे फिंगरप्रिंट या फेस लॉक को जरूर एक्टिव रखें.
क्या Tap-to-Pay अब भी सुरक्षित है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक टैप-टू-पे अब भी कार्ड स्वाइप करने या डालने से ज्यादा सुरक्षित है, क्योंकि इसमें ट्रांजैक्शन एन्क्रिप्टेड होती है और डेटा क्लोन करना मुश्किल होता है. खतरा कम है, लेकिन अनजान और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर यह जोखिम बढ़ सकता है. थोड़ी-सी सतर्कता आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है.




