रुद्रपुर में शिक्षा नहीं, ‘स्टेटस’ का खेल? डीपीएस के खिलाफ सोमवार से बड़ा आंदोलन, अभिभावकों में उबाल

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रुद्रपुर। ऊधमसिंहनगर के चर्चित निजी स्कूल Delhi Public School Rudrapur एक बार फिर विवादों में घिर गया है। कक्षा 4 की एक छात्रा की मां को कथित रूप से धमकाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अभिभावकों का आरोप है कि जब उन्होंने स्कूल में बच्चों को हो रही परेशानियों की शिकायत की, तो उन्हें “टीसी ले जाओ” जैसी बात कहकर दबाव बनाया गया। इस घटना के बाद अब सोमवार से स्कूल के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


“शिकायत की सजा – धमकी और अपमान”
मामला तब सामने आया जब एक अभिभावक ने स्कूल प्रशासन को अपनी बच्ची से जुड़ी समस्याओं से अवगत कराया। आरोप है कि इसके बजाय समाधान देने के बजाय स्कूल प्रबंधन ने अभिभावक को ही कठघरे में खड़ा कर दिया।
परिजनों का कहना है कि उन्हें साफ शब्दों में कहा गया—
अगर दिक्कत है तो टीसी ले जाइए”
इस कथित रवैये ने अभिभावकों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।
फीस, किताबें और ‘स्टेटस’ का दबाव
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल में शिक्षा के नाम पर व्यावसायिक मॉडल हावी हो चुका है।
महंगी किताबें और यूनिफॉर्म
हर कार्यक्रम के नाम पर अलग शुल्क
साल भर अतिरिक्त गतिविधियों के नाम पर आर्थिक बोझ
फीस में लगातार वृद्धि
कई अभिभावकों का कहना है कि यहां बच्चों को पढ़ाई से ज्यादा “हाई स्टेटस” की मानसिकता दी जाती है, जिससे मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों के बच्चों में हीन भावना पनप रही है।
एक ही प्रबंधन, अलग-अलग वर्ग?
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि एक ही प्रबंधन के अंतर्गत अलग-अलग स्तर के स्कूल संचालित हो रहे हैं—
जहां एक ओर उच्च वर्ग के लिए महंगे स्कूल हैं, वहीं दूसरी ओर मध्यम वर्ग और गरीबों के लिए अलग व्यवस्था।
इससे शिक्षा में वर्गभेद को बढ़ावा मिलने का आरोप लगाया जा रहा है।
“फीस नहीं तो सम्मान नहीं”
अभिभावकों का कहना है कि यदि कोई परिवार स्कूल की महंगी फीस या अन्य खर्च वहन नहीं कर पाता, तो बच्चे के साथ व्यवहार बदल जाता है।
कई मामलों में अभिभावकों ने मजबूरी में अपने बच्चों का नाम कटवाकर अन्य स्कूलों में दाखिला कराया है।
सोमवार से आंदोलन का ऐलान
इस पूरे मामले को लेकर अब अभिभावक एकजुट हो गए हैं।
सोमवार से स्कूल गेट पर प्रदर्शन और विरोध की योजना बनाई जा रही है।
संभावित मांगें:
अभिभावक के साथ कथित दुर्व्यवहार पर कार्रवाई
फीस और अन्य शुल्कों की जांच
स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही तय करना
शिक्षा में भेदभाव खत्म करना
बड़ा सवाल
रुद्रपुर में यह पहला मामला नहीं है। निजी स्कूलों की मनमानी, फीस वसूली और अभिभावकों के शोषण के आरोप पहले भी उठते रहे हैं।
अब सवाल यह है कि—
क्या शिक्षा संस्थान ज्ञान के मंदिर रह गए हैं या पूरी तरह व्यापार केंद्र बन चुके हैं?
क्या प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप करेगा या अभिभावकों को ही सड़क पर उतरकर न्याय मांगना पड़ेगा?
(यह रिपोर्ट अभिभावकों के आरोपों और सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के आधार पर तैयार की गई है। प्रशासनिक और स्कूल पक्ष का आधिकारिक बयान आना अभी बाकी है।)


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