

जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हस्तक्षेप करेगा? इस पर उन्होंने कहा कि मैं हस्तक्षेप कर सकता हूं, लेकिन पाकिस्तान के साथ मेरे बहुत अच्छे संबंध हैं. पाकिस्तान इस समय बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है. पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि देश में हुए आतंकी हमलों में भारत की भूमिका है. उनका कहना है कि अफगान तालिबान के इलाके का इस्तेमाल इन गतिविधियों के लिए किया जाता है. पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संघर्ष गुरुवार देर रात शुरू हुआ, जब 22 फरवरी को पाकिस्तानी हवाई हमले के जवाब में अफगानिस्तान ने कार्रवाई की। इसके बाद पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन गजब-लिल-हक’ शुरू किया। पाकिस्तानी वायु सेना ने काबुल, कंधार, पक्तिया, नंगरहार और अन्य प्रांतों में हवाई हमले किए।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
पाकिस्तान का दावा- 274 अफगानी लड़ाके मारे गए
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी के मुताबिक, अब तक 274 तालिबान लड़ाके मारे गए हैं और 400 से ज्यादा घायल हुए हैं. उनका कहना है कि 115 टैंक और बख्तरबंद गाड़ियाँ नष्ट हो गईं, 74 चौकियाँ नष्ट हो गईं और 18 चौकियों पर पाकिस्तानी सेना ने कब्ज़ा कर लिया है. पाकिस्तान ने भी माना कि उसके 12 सैनिक मारे गए और 27 घायल हुए. जबकि तालिबान का कहना है कि उसके केवल 8 से 13 लड़ाके ही मारे गए और कुछ घायल हो गए. इसमें दावा किया गया कि 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और दो सेना मुख्यालयों सहित कई चौकियों पर कब्जा कर लिया गया। तालिबान ने चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान ने आगे हमला किया तो कड़ा जवाब दिया जाएगा.
पाकिस्तान में निजी ड्रोन उड़ाने पर रोक
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसने ड्रोन से पाकिस्तान के अंदर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. इस बीच, पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा कि एबटाबाद, स्वाबी और नौशेरा में छोटे ड्रोन गिराए गए और कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ. इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने तुरंत पूरे देश में निजी ड्रोन उड़ाने पर रोक लगा दी है. पूर्व पाकिस्तानी सेना अधिकारी आदिल रजा ने दावा किया कि अफगानिस्तान से उड़ाए गए ड्रोन ने इस्लामाबाद के पास एक परमाणु ऊर्जा केंद्र सहित कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
पाकिस्तान की संसद में निंदा प्रस्ताव पारित
पाकिस्तान की सीनेट ने अफगानिस्तान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि आगे किसी भी उकसावे पर कड़ी और निर्णायक प्रतिक्रिया दी जाएगी. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सेना मुख्यालय का दौरा किया और जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई. पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने अफगान तालिबान सरकार को अवैध बताया और आरोप लगाया कि वहां महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकार छीने जा रहे हैं.
पाकिस्तान ने टीटीपी और आईएसआईएस के ठिकानों पर हवाई हमला किया था
22 फरवरी को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में हवाई हमला किया. पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों में टीटीपी के ठिकानों पर कार्रवाई में 70 लड़ाके मारे गए. बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने दावा किया कि यह संख्या 80 तक पहुंच गई है. अफगानिस्तान ने इन हमलों की कड़ी निंदा की थी. तालिबान ने कहा कि हमलों में नागरिकों को निशाना बनाया गया. टोलो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, नंगरहार में एक घर पर हमले के बाद एक ही परिवार के 23 लोग मलबे में दब गए. वहीं, अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान को ‘सही समय पर कड़ा जवाब’ दिया जाएगा. मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया था. पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बना रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकवादी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि टीटीपी अफगानिस्तान से काम कर रहा है, जबकि तालिबान सरकार लगातार इन आरोपों से इनकार करती रही है।
दोनों देशों के बीच पहले भी तनाव रहा है
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड रेखा को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। दोनों देश एक दूसरे पर हमले और आतंकियों को छुपाने का आरोप लगाते रहते हैं. 2021 में तालिबान द्वारा अफगानिस्तान सरकार पर कब्ज़ा करने के बाद तनाव और बढ़ गया है
खोस्त में दिए गए एक भाषण में हक्कानी ने कहा कि यदि तालिबान ने एक दिन के लिए भी पाकिस्तान के खिलाफ उसी सख्ती से कार्रवाई की, जैसी उसने नाटो बलों के खिलाफ की थी, तो “पाकिस्तान का नक्शा बदल सकता है।” उन्होंने कसम खाते हुए संकेत दिया कि यदि आत्मघाती और जटिल हमलों जैसी रणनीति अपनाई गई, तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
हक्कानी का यह बयान उस पृष्ठभूमि में आया है जब अफगानिस्तान में दो दशकों तक चले युद्ध के दौरान तालिबान ने गुरिल्ला युद्ध और आत्मघाती हमलों का व्यापक इस्तेमाल किया था। उस समय NATO और अमेरिकी बलों के खिलाफ लगातार हमले होते रहे। अफगानिस्तान में लगभग हर दूसरे दिन विस्फोट और हमलों की खबरें सामने आती थीं। अगस्त 2021 में अमेरिकी सैनिकों की वापसी के अंतिम चरण के दौरान काबुल में हुए भीषण बम धमाके में 150 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। विश्लेषकों का मानना है कि हक्कानी ने पाकिस्तान को उसी तरह की रणनीति की ओर इशारा करते हुए चेतावनी दी है।
इस बयान से एक दिन पहले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के नेता मुफ्ती नूर वली महसूद ने भी पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर हमलों की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि वे “इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान” की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं और लड़ाकों को व्यापक कार्रवाई का आदेश दिया है। टीटीपी का खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में प्रभाव माना जाता है, जिससे पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
तालिबान नेतृत्व के भीतर रणनीति को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण भी सामने आ रहे हैं। जहां रक्षा मंत्री मुल्ला याकूब पारंपरिक सैन्य तैयारी और खुली टकराव की बात कर रहे हैं, वहीं हक्कानी असममित युद्ध और फिदायीन हमलों की रणनीति की ओर झुकाव दिखा रहे हैं। माना जा रहा है कि हक्कानी संघर्ष को सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित रखने के बजाय पाकिस्तान के भीतर तक ले जाने का संकेत दे रहे हैं।हक्कानी नेटवर्क ने 20 वर्षों तक अमेरिकी और नाटो बलों को चुनौती दी थी, जिसके बाद अमेरिका को अफगानिस्तान से हटना पड़ा। इसी संदर्भ में हक्कानी ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir को परोक्ष रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि जिस क्षमता से तालिबान ने दुनिया की बड़ी ताकतों को थकाया, वैसी ही ताकत यदि पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल की गई, तो हालात बदल सकते हैं।




