

यूनेस्को के अनुसार, अरग स्क्वायर के आसपास हुए हमले के बाद उठे मलबे और धमाके की तीव्र तरंगों से महल के कुछ हिस्से प्रभावित हुए. गोलिस्तान पैलेस (गुलाबों का महल) का भारत से भी ऐतिहासिक संबंध जुड़ा है. महल के सलाम हॉल में कभी प्रसिद्ध मयूर सिंहासन रखा गया था.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
यूनेस्को ने बयान जारी कर कहा कि वह ईरान और पूरे क्षेत्र में सांस्कृतिक धरोहरों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, ताकि उनके संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें. रिपोर्टों के मुताबिक, हालिया अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद इस ऐतिहासिक परिसर को क्षति पहुंचने की सूचना मिली. ईरान के सांस्कृतिक विरासत मंत्री सैयद रेज़ा सालेही अमीरी ने मौके का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया. वहीं विशेषज्ञ टीमों द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है. यह महल 1954 के हेग कन्वेंशन के तहत संरक्षित सांस्कृतिक संपत्ति की श्रेणी में आता है, जो सशस्त्र संघर्ष के दौरान विरासत स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है.




