

यह बात हमारे हुक्मरानों को भी पता है. इसी कारण भारत ने बिना किसी शोर-शराबे एक बड़ा धमाका किया है, जिसकी शोर बहुत दूर तक सुनाई दी है. दरअसल, रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने बंगाल की खाड़ी में समुद्र से लॉन्च होने वाली बैलेस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. इस टेस्ट से स्पष्ट हो गया है कि भारत अब धरती, आसमान और समंदर तीनों जगहों से दुश्मन के ठिकानों पर परमाणु हमला करने की क्षमता से पूरी तरह लैस हो चुका है. इस टेस्ट से पहले ही भारत ने विशाखापट्टनम तट से पहले ही जारी नोटम से मेल खाता है. इस नोटम का रेंज 3240 किमी है.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
हालांकि इस टेस्ट के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई ऑफिशिलय कंफर्मेशन नहीं आया है. नहीं इसकी रेंज और वैरिएंट के बारे में कोई जानकारी दी गई है. लेकिन, डिफेंस एक्सपर्ट बताते हैं यह के-4 एसएलबीएम मिसाइल हो सकती है. ऐसी संभावना जताई जा रही है कि इसे परमाणु शक्ति से लैस पनडुब्बी (सबमरीन) आईएनएस अरिघात से फायर किया गया हो. आईएनएस अरिघात देश में ही निर्मित है. कुछ रिपोर्ट में इसके के-5 के अगली पीढ़ी के परीक्षण की बात कही जा रही है. इन रिपोर्ट में के-4 को ही प्रमुख बताया जा रहा है. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि यह परीक्षण 23 तारीख की सुबह में हुआ था.
बीते कुछ सालों में भारत ने अपनी एसएलबीएम टेस्टिंग प्रोग्राम को धार दी है. पिछले साल ही भारत ने बंगाल की खाड़ी में ही परमाणु शक्ति संपन्न के-4 का सफल परीक्षण किया था. इस परीक्षण के साथ ही भारत ने सेकेंड स्ट्राइक की ताकत हासिल कर ली थी. इससे दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में उसकी खास और ताकत और मजबूत हुई थी.
क्या है के-4 मिसाइल
के-4 का पूरा नाम कलाम-4 है. यह भारत की स्वदेशी सबमरीन-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) है, जिसे डीआरडीओ ने विकसित किया है. यह परमाणु-सक्षम मिसाइल अरिहंत-क्लास पनडुब्बियों जैसे INS अरिहंत और INS अरिघाट से लॉन्च होती है. इसकी मारक क्षमता लगभग 3,500 किलोमीटर है, जो इसे पाकिस्तान और चीन के प्रमुख लक्ष्यों तक पहुंचने में सक्षम बनाती है. मिसाइल की लंबाई 12 मीटर, व्यास 1.3 मीटर और वजन करीब 17 टन है. यह 2 टन तक वारहेड ले जा सकती है और ठोस ईंधन से संचालित दो-स्टेज वाली मिसाइल है. पिछले वर्षों में के-4 के कई सफल परीक्षण हुए हैं. 2020 में अंतिम डेवलपमेंट परीक्षण सफल हुआ था. फिर नवंबर 2024 में INS अरिघाट से पहली बार पनडुब्बी से सफल लॉन्च हुआ. एक बार फिर मंगलवार यानी 23 दिसंबर को बंगाल की खाड़ी में गोपनीय परीक्षण किया गया. यह परीक्षण भारत की न्यूक्लियर ट्रायड (जमीन, हवा, समुद्र से हमला) को मजबूत करता है और सेकंड-स्ट्राइक क्षमता बढ़ाता है.




