

मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी भारी तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों में आई रुकावटों ने देश की ऊर्जा सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसद में दिए गए भाषणों और 25 मार्च को हुई हाई-लेवल सर्वदलीय बैठक के बाद ‘एनर्जी लॉकडाउन’ की चर्चा ने आग पकड़ ली है। अगर यह लागू होता है, तो आपकी जिंदगी पूरी तरह बदलने वाली है। तेल की राशनिंग से लेकर वर्क फ्रॉम होम तक, बहुत कुछ नया देखने को मिल सकता है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
आखिर कैसे शुरू हुई इस ‘लॉकडाउन’ की चर्चा?
सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक ‘एनर्जी लॉकडाउन’ शब्द तब से ट्रेंड कर रहा है, जब से प्रधानमंत्री ने वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली दिक्कतों का जिक्र किया है। केंद्र सरकार ने 25 मार्च को शाम 5 बजे एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसमें पश्चिम एशिया युद्ध के भारत पर पड़ने वाले आर्थिक और ऊर्जा प्रभावों पर मंथन हुआ। कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार ईंधन की खपत को काबू में करने के लिए कड़े कदम उठा सकती है। हालांकि सरकार ने पर्याप्त स्टॉक होने का भरोसा दिया है, लेकिन भविष्य की अनिश्चितता को देखते हुए मांग घटाने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है।
क्या है एनर्जी लॉकडाउन का असली मतलब?
सरल भाषा में कहें तो एनर्जी लॉकडाउन ऊर्जा संसाधनों को बचाने की एक ऐसी स्थिति है, जहां फिजूलखर्ची पर कड़ा अंकुश लगाया जाता है। जब ईंधन और बिजली की भारी कमी होने लगती है, तो सरकारें मजबूरन आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियों पर पाबंदियां लगाती हैं। इसे आप ‘संसाधनों का राशनिंग काल’ भी कह सकते हैं। इसका मकसद अनिवार्य सेवाओं (जैसे अस्पताल और एंबुलेंस) के लिए ऊर्जा बचाना है। यह समाज को अनुशासित उपभोग की ओर ले जाने का एक कड़ा तरीका है।
सोशल मीडिया पर क्यों मचा है बवाल?
इस चर्चा को हवा देने में इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की बड़ी भूमिका है। वे इन ऊर्जा संरक्षण के कदमों को 2020 के कोविड लॉकडाउन से जोड़कर पेश कर रहे हैं, जिससे जनता के मन में डर और उत्सुकता दोनों है। जब लोग वर्क फ्रॉम होम या गाड़ियों पर रोक की बात सुनते हैं, तो उन्हें पुराने दिन याद आ जाते हैं। यही वजह है कि ‘एनर्जी लॉकडाउन’ आज डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला शब्द बन गया है।
परिवहन और गाड़ियों पर कसेगी लगाम
एनर्जी लॉकडाउन की स्थिति में सबसे पहले गाज परिवहन व्यवस्था पर गिर सकती है। ईंधन की राशनिंग के तहत पेट्रोल और डीजल की बिक्री सीमित की जा सकती है। बड़े शहरों में ट्रैफिक कम करने के लिए ‘कार-फ्री संडे’ या ‘ऑड-इवन’ जैसी व्यवस्था दोबारा लौट सकती है। निजी बस ऑपरेटरों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में डीजल की कमी के कारण लंबी दूरी की यात्राएं न सिर्फ महंगी होंगी, बल्कि मुश्किल भी हो सकती हैं।
दफ्तरों और स्कूलों का बदलेगा स्वरूप
कोरोना काल की यादें ताजा करते हुए सरकार एक बार फिर वर्क फ्रॉम होम (WFH) की गाइडलाइंस जारी कर सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य दफ्तर जाने वाले लाखों लोगों द्वारा खर्च किए जाने वाले ईंधन की बचत करना है। इसी तरह, स्कूलों और कॉलेजों को भी ऑनलाइन मोड पर वापस जाने के लिए कहा जा सकता है ताकि स्कूल बसों और निजी वाहनों को सड़कों से हटाकर ऊर्जा की बड़ी बचत की जा सके।
IPL और मनोरंजन पर संकट के बादल
भारत में आईपीएल (IPL) जैसे बड़े आयोजनों का समय करीब है, लेकिन एनर्जी लॉकडाउन के चलते स्टेडियमों में दर्शकों के प्रवेश पर रोक लग सकती है। भारी भीड़ के जुटने से होने वाली बिजली की खपत और वहां तक पहुंचने वाले वाहनों को रोकने के लिए सरकार सख्त हो सकती है। सार्वजनिक कार्यक्रमों, रैलियों और बड़े जलसों पर भी पाबंदी लग सकती है। हवाई यात्रा के क्षेत्र में भी उड़ानों की संख्या कम की जा सकती है क्योंकि जेट फ्यूल (ATF) की कीमतें और उपलब्धता बड़ी चुनौती बन गई हैं।
इंडस्ट्री और कमर्शियल गैस पर पड़ेगा असर
ऊर्जा संकट का असर व्यापार पर दिखना शुरू हो गया है। होटलों, रेस्टोरेंट्स और बेकरी को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की भारी किल्लत झेलनी पड़ सकती है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को बचाने के लिए उद्योगों की गैस सप्लाई में कटौती कर दी है। पेट्रोकेमिकल जैसी भारी विनिर्माण इकाइयां अस्थायी रूप से बंद की जा सकती हैं ताकि घरों के लिए बिजली और गैस बची रहे।
घरेलू रसोई और गैस की वर्तमान स्थिति
देश के कई राज्यों में गैस स्टेशनों पर किलोमीटर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग घबराहट में (Panic Buying) गैस सिलेंडर जमा कर रहे हैं, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है। एलपीजी की डिलीवरी में देरी हो रही है और नए कनेक्शनों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। कई इलाकों में कालाबाजारी की खबरें भी आ रही हैं, जिसे देखते हुए सरकार ने नागरिकों से स्टॉक न करने की अपील की है।
क्या खुला रहेगा और क्या होंगी प्राथमिकताएं?
एनर्जी लॉकडाउन का मतलब पूरी तरह काम ठप करना नहीं है। अस्पताल, फायर ब्रिगेड और पुलिस जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए ईंधन मिलता रहेगा। मेट्रो रेल, सरकारी बसें और ट्रेनें चलती रहेंगी ताकि आम जनता को कम परेशानी हो। बिजली घरों और रिफाइनरियों को पहली प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य यही है कि भले ही कमर्शियल सेक्टर थोड़ा धीमा हो जाए, लेकिन घरों की बत्ती और चूल्हा जलता रहे।




