India-Israel Hexagon Alliance 2026: अरब सागर की लहरों से लेकर मिडिल ईस्ट के तपते रेगिस्तानों तक, इस वक़्त एक भू-राजनीतिक में भयंकर तूफान उठा है जिसने पूरी दुनिया की निगाहें अपनों तरफ खींच ली हैं

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इस कड़ी में अमेरिका, चीन और रूस तक इस खेल से कहीं भी अछूते नहीं हैं। ईरान पर अमेरिका की तैयारी और भारत के कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक ने क्षेत्रीय समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

पीएम मोदी का इजराइल दौरा बेहद अहम

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे की टाइमिंग महत्वपूर्ण माना गया। बता दे, यह दौरा उस वक़्त हुआ जब अमेरिका ईरान पर एक बड़े मिलिट्री एक्शन की पूरी तैयारी कर चुका था। इस तनावपूर्ण माहौल में मोदी का इजराइल पहुंचना कोई संयोग की बात नहीं बल्कि एक बड़ा ही सख्त संदेश है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों के हितों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

इजराइल के साथ ऐतिहासिक समझौता

पीएम मोदी के इजराइल दौरे के दौरान भारत और इजराइल के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता भी हुआ। इस समझौते के अन्तर्गत इजराइल की सबसे एडवांस एयर डिफेंस तकनीक, जिसे विश्व आयरन डोम और आयरन बीम के नाम से जानती है, अब सीधे भारत के साथ साझा की जाएगी। यह वही तकनीक है जिसने हमास और ईरान समर्थित गुटों के अनगिनत रॉकेटों को हवा में ही पूरी तरह तबाह कर दिया था।

बता दे, यह समझौता उत्पादन भारत में गोपनीयता के साथ किया गया था। यह कदम न सिर्फ पाकिस्तान और तुर्की के लिए बड़ी चेतावनी थी, बल्कि ईरान को भी संदेश दिया कि भारत अब कूटनीतिक मंच पर बैकफुट पर नहीं बल्कि फ्रंटफुट पर खेल करेगा।

17 भारतीयों का मुद्दा और जवाबी कार्रवाई

भारत का ईरान के प्रति अचानक कड़ा रवैया, दिसंबर में समंदर में फंसे 17 भारतीय नाविकों से जुड़ा था। ईरान ने एक कमर्शियल जहाज को जबरन अपने कब्जे में ले लिया और भारतीय क्रू मेंबर्स को रोक रखा। सिर्फ 8 नाविकों की रिहाई हुई, जबकि बाकी को जानबूझकर रोके रखना ईरान की साजिश का भाग था।

भारत ने इसके जवाब में कोई डायलॉग नहीं बल्कि कार्रवाई चुनी। भारतीय नौसेना ने अरब सागर में ईरानी तेल टैंकरों को इंटरसेप्ट किया और उन्हें अपने नियंत्रण में लिया। यह सर्जिकल एक्शन ईरान के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा गया था, क्योंकि इससे उसकी खस्ता अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ा।

साथ ही, भारत ने ईरान से कच्चे तेल के आयात को पूरी तरह रोक दिया। भारत विश्व का बड़ा बाजार है और इससे ईरान को अरबों डॉलर का भारी-भरकम नुकसान झेलना पड़ा था। इसके बाद, सरकार ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सख्त एडवाइज़री जारी की। यह संकेत था कि भारत किसी भी नागरिक की सुरक्षा को खतरे में नहीं डालेगा।

खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया और हेक्सागन एलायंस

पीएम मोदी के इजराइल दौरे के वक़्त, UAE से भी पॉजिटिव सिग्नल्स आये थे। अब भारत, इजराइल और UAE का गठजोड़ मिडिल ईस्ट में नई धुरी बन चुका है। यह गठजोड़ ईरान और पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग कर रहा है। इंडिया-मिडिल ईस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट इस भरोसे और साझेदारी की नींव पर टिके हैं। अमेरिका के सैन्य दबाव के बीच भारत का इजराइल के साथ खड़ा होना एक नए वैश्विक समीकरण की शुरुआत है।

आर्थिक और रणनीतिक संदेश

वहीं, ईरान ने भारत के चाबहार पोर्ट में भारी निवेश किया था, जिससे वह पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच बना सके। लेकिन ईरान के बदलते रवैये ने भारत के विश्वास को एक झटके में तार-तार कर दिया। भारत ने आर्थिक और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर सख्त कदम उठाए।

तेल टैंकरों की जब्ती और आयात रोकने के बाद भारत ने दिखा दिया कि किसी भी खतरे के वक़्त वह पूरी ताकत से जवाब देने को तैयार है। इससे न सिर्फ ईरान का गुरूर टूटा, बल्कि अमेरिका और सऊदी अरब को भी साफ़ तौर से संदेश गया कि भारत अब अपने हितों के लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है।

भारत के इजराइली दौरे का प्रभाव

भारत का इजराइल दौरा, 17 नाविकों के मुद्दे पर सख्त कार्रवाई और हेक्सागन एलायंस पर साइन, सभी मिलकर यह दर्शाया कि भारत अब फ्रंटफुट पर आकर अपने हितों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए निर्णायक कदम उठा रहा है। इसने पाकिस्तान, ईरान और तुर्की के सामरिक और राजनीतिक खेल को चुनौती दी है। अब मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका पहले से कहीं अधिक निर्णायक और प्रभावशाली हो गई है।

बता दे, इस रणनीतिक मोड़ ने साफ कर दिया है कि भारत अब किसी भी देश के सामने कमजोर नहीं बल्कि अपनी ताकत और कूटनीतिक निर्णय क्षमता के साथ वैश्विक मंच पर मजबूती से खड़ा है।


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