

रुद्रपुर,उत्तराखंड में न्याय अब अपराध की नहीं, आरोप लगाने वाले की कुंडली देखकर तय किया जा रहा है। देहरादून पुलिस द्वारा उर्मिला सनावर की “कुंडली खंगालने” की घोषणा इसी विडंबना का ताजा उदाहरण है। जिस महिला ने सत्ता से जुड़े एक प्रभावशाली व्यक्ति पर आरोप लगाए, आज वही महिला कानून की कसौटी पर खड़ी कर दी गई है—उसके पुराने वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट, मुकदमे, यहां तक कि उसकी मानसिक और नैतिक पड़ताल की जा रही है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यही पैमाना सत्ता में बैठे लोगों पर भी लागू होता है?
अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे जघन्य मामले में जिन बीआईपी चेहरों के नाम बार-बार सामने आए, जिन पर सबूत मिटाने से लेकर संरक्षण तक के आरोप लगे—क्या उनकी भी कभी “कुंडली” खंगाली गई? क्या उनके फोन, उनके सोशल मीडिया, उनके संबंधों और उनके प्रभाव की भी वैसी ही फॉरेंसिक जांच हुई जैसी आज एक आरोप लगाने वाली महिला की हो रही है?
यह उत्तराखंड है—यहां आरोप लगाना अपराध बन जाता है और आरोपी सत्ता की कुर्सी पर सुरक्षित बैठे रहते हैं।
यहां बुलडोजर सबूतों पर चलता है, लेकिन सत्ता के दरवाजों तक नहीं पहुंचता।
यहां एफएसएल लैब में ऑडियो-वीडियो भेजे जाते हैं, लेकिन सत्ता के संरक्षण की फाइलें कभी खुलती नहीं।
उर्मिला पर ब्लैकमेलिंग, एआई से वीडियो बनाने, अश्लीलता फैलाने जैसे आरोपों की जांच जरूरी है—इससे कोई इनकार नहीं। लेकिन सवाल न्याय के संतुलन का है। कानून यदि केवल कमजोर, असहज और आरोप लगाने वाले पर ही सख्त हो जाए, तो वह कानून नहीं, डर का औजार बन जाता है।
और सबसे खतरनाक संदेश यह जाता है कि
अगर तुम सत्ता के खिलाफ बोलोगे, तो तुम्हारा चरित्र जांचा जाएगा
तुम्हारे पुराने मामले उछाले जाएंगे
तुम्हें ही कठघरे में खड़ा कर दिया जाएगा
यह लोकतंत्र नहीं, यह न्याय का उल्टा प्रवाह है।
अंकिता भंडारी की हत्या केवल एक अपराध नहीं थी, वह सत्ता, सिस्टम और संरक्षण के गठजोड़ का आईना थी। उस आईने को तोड़ने की कोशिश आज भी जारी है—कभी सबूत मिटाकर, कभी सवाल पूछने वालों को डराकर।
आज उर्मिला निशाने पर है, कल कोई और होगी।
जब तक आरोप लगाने वालों की नहीं, आरोपियों की कुंडली खंगालने की हिम्मत इस सिस्टम में नहीं आएगी, तब तक उत्तराखंड में यही कहा जाएगा—
यहां कुछ भी हो सकता है।
आरोप लगाने वाले सलाखों के पीछे,
और आरोपी सत्ता में बैठे हुए।




