मासूमियत के खून से लाल हुई धरती?दरिंदों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।दरिंदों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में जसपुर की घटना ने पूरे समाज के ज़मीर को झकझोर कर रख दिया है। एक 14 साल की बच्ची, जो मंदिर में प्रसाद लेने गई थी, गन्ने के खेत में खून से लथपथ मृत पाई गई। इस निर्मम हत्या से पहले रेप की आशंका जताई जा रही है। यह वारदात केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की असफलता का दर्पण है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

आज सवाल यह है कि आखिर हमारे समाज में ये दरिंदे कहाँ से ताकत पाते हैं? क्यों महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध रुकने का नाम नहीं लेते? कानून सख्त होने के बावजूद अपराधियों का खौफ क्यों नहीं मिट रहा? इसका सीधा जवाब है— हमारी व्यवस्था की ढिलाई और समाज का मौन।

ग्रामीणों का आक्रोश जायज है। जब तक हत्यारोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी, न्याय की उम्मीद अधूरी है। बच्ची का शव उठाने से लोगों का इनकार और हाईवे जाम लगाना प्रशासन के प्रति अविश्वास को दर्शाता है। नेताओं और अधिकारियों को अब समझना होगा कि जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होगी, उन्हें ठोस कार्रवाई चाहिए।

हमारी मांग स्पष्ट है:

  • आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मुकदमा।
  • दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा, ताकि यह केस नजीर बने।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सुरक्षा के लिए पुलिस गश्त और सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था।
  • बच्चियों और महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए सामाजिक स्तर पर जनजागरूकता अभियान।

यह सिर्फ जसपुर की बच्ची का मामला नहीं है; यह हर उस बच्ची की चीख है जो अपनी मासूमियत खो बैठी। अब वक्त है कि समाज भी खड़ा हो और दरिंदों को यह संदेश दे कि इंसानियत पर हमला करने वालों को कोई पनाह नहीं मिलेगी।

दरिंदों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।



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