खरमास साल में 2 बार आता है, जब सूर्य धनु और मीन राशि में होते हैं. यह 2 महीने का समय दिसंबर मध्‍य से जनवरी में मकर संक्रांति तक और मार्च के मध्‍य से अप्रैल के मध्‍य तक रहता है.

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हिंदू धर्म में खरमास के समय को अशुभ माना गया है और इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ-मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. 16 दिसंबर 2025 को धनु संक्रांति से एक बार फिर खरमास शुरू होने जा रहा है, जो कि 14 जनवरी 2026 तक चलेगा. खरमास का समय अशुभ होने के पीछे क्‍या-क्‍या धार्मिक और ज्‍योतिषीय कारण हैं? जानिए.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

खरमास के अशुभ होने के पीछे धार्मिक कारण

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान सूर्यदेव 7 घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ब्रह्मांड की परिक्रमा करते रहते हैं. वे कभी भी कहीं पर भी रुक नहीं सकते हैं क्‍योंकि उनके रुकते ही जनजीवन ठहर जाएगा. इसके चलते उनके रथ में घोड़े लगातार चलने व विश्राम न मिलने के कारण भूख-प्यास से बहुत थक जाते हैं. एक बार उनकी यह दयनीय दशा देखकर सूर्यदेव का मन भी द्रवित हो गया. तक भगवान सूर्यदेव उन्हें एक तालाब किनारे ले गए, ताकि घोड़े पानी पी सकें और कुछ आराम कर सकें. लेकिन उन्हें तभी यह भी आभास हुआ कि अगर रथ रुका तो अनर्थ हो जाएगा. लेकिन घोड़ों का सौभाग्य कहिए कि तालाब के किनारे दो खर मौजूद थे.

तब भगवान सूर्यदेव घोड़ों को पानी पीने व विश्राम देने के लिए छोड़ दिया और खर यानी गधों को अपने रथ में जोड़ लिया. चूंकि घोड़ा, घोड़ा होता है और गधा, गधा. रथ में गधे जोड़ने से रथ की गति धीमी हो गई. साथ ही सूर्य का तेज भी कुछ कम हो गया. फिर भी जैसे-तैसे 1 मास का चक्र पूरा होता है और तब तक घोड़ों को भी विश्राम मिल चुका होता है. इसके बाद सूर्य देव फिर से घोड़ों को रथ में जोड़ लेते हैं. इस तरह जब भी सूर्य धनु राशि में आते हैं खरमास शुरू हो जाता है. चूंकि इस दौरान सूर्य का तेज कम रहता है लिहाजा शुभ कार्यों का भी पूरा फल नहीं मिलता है इसलिए खरमास को अशुभ माना जाता है.

खरमास अशुभ होने के पीछे ज्‍योतिषीय कारण

– जब सूर्य गुरु की राशि धनु या मीन में आते हैं तो इससे गुरु ग्रह का प्रभाव कम हो जाता है. जबकि शुभ कार्यों के लिए गुरु का प्रभावी होना जरूरी है. इसलिए सूर्य के धनु या मीन में आते ही शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है.

– ज्‍योतिष के अनुसार सूर्य और गुरु के बीच शत्रुता का भाव है. ऐसे में गुरु की राशि में आने पर सूर्य अपना तेज कम कर देते हैं. इस कारण सूर्य शुभ फल नहीं देते हैं.

– चूंकि सभी शुभ कार्यों के लिए सूर्य और गुरु ग्रह का प्रभावी होना जरूरी है लेकिन सूर्य के धनु व मीन राशि में रहने पर इन दोनों ग्रहों का प्रभाव कम हो जाता है. इसलिए कोई भी नया कार्य करने या शुभ कार्य करने पर उसका परिणाम शुभ नहीं होता है अथवा पूरा फल नहीं मिलता है. इसलिए खरमास में नए काम की शुरुआत नहीं की जाती है.


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