

किच्छा। नगर निकाय चुनाव को लेकर किच्छा और सिरौली कला क्षेत्र में राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस विधायक के इशारे पर उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर कर चुनाव प्रक्रिया में बार-बार अवरोध खड़ा किए जाने के आरोपों से नाराज़ हजारों की संख्या में किच्छा और सिरौली कला की जनता सड़कों पर उतर आई।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
आज सुबह लगभग 10:30 बजे से ही नई मंडी, किच्छा में लोगों का जुटना शुरू हो गया। सिरौली कला और किच्छा नगर पालिका के विभिन्न वार्डों से लोग झुंड के झुंड हाथों में तख्तियां और स्लोगन लिखे प्लेकार्ड लेकर पहुंचे। तख्तियों पर “सिरौली कला को अलग रखकर चुनाव कराओ”, “विकास रोकोगे तो जवाब मिलेगा” जैसे नारे लिखे थे।
इसके बाद पूर्व विधायक Rajesh Shukla की अगुवाई में नई मंडी से परगनाधिकारी कार्यालय तक विशाल जुलूस निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि सिरौली कला को किच्छा से अलग रखते हुए दोनों स्थानों पर स्वतंत्र रूप से नगर निकाय चुनाव कराए जाएं, ताकि विकास कार्यों में आ रही बाधाएं समाप्त हों।
“राजनीतिक स्वार्थ में विकास बाधित”
सभा को संबोधित करते हुए राजेश शुक्ला ने कहा कि उत्तराखंड की Pushkar Singh Dhami सरकार ने उनके अनुरोध पर सिरौली कला को किच्छा से अलग नगर पालिका का दर्जा दिया था। लेकिन कांग्रेस पार्टी, जिसे उन्होंने “वोट बैंक की राजनीति करने वाली पार्टी” बताया, इस निर्णय से असहज हो गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि किच्छा नगर पालिका चुनाव सिरौली कला के मतों के सहारे जीतने की मंशा से अलग नगर पालिका बनाए जाने का विरोध किया गया और क्षेत्रीय विधायक Tilak Raj Behar के करीबी लोगों के माध्यम से माननीय उच्च न्यायालय में रिट दायर कर चुनाव प्रक्रिया को उलझा दिया गया।
शुक्ला ने कहा कि पिछले एक वर्ष से किच्छा नगर पालिका और लगभग छह वर्षों से सिरौली कला का मामला न्यायालय में लंबित रहने के कारण करोड़ों रुपये की विकास योजनाएं अटक गई हैं। उन्होंने कहा कि इसका सीधा नुकसान जनता को हो रहा है और इसकी जिम्मेदारी कांग्रेस पर है।
“हम इंसान हैं, वोट बैंक नहीं”
पूर्व प्रधान सिरौली कला नासिर खान ने कहा कि जब सिरौली कला किच्छा नगर पालिका का हिस्सा था, तब इस क्षेत्र की उपेक्षा हुई। अलग नगर पालिका का दर्जा मिलने से क्षेत्रवासियों में विकास की उम्मीद जगी थी, लेकिन न्यायालय में मामला लंबित रहने से विकास कार्य ठप पड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम इंसान हैं, वोट बैंक नहीं।”
सिरौली निवासी विधान मलिक और नाजिम मलिक सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि धामी सरकार द्वारा सिरौली कला को नगर पालिका बनाने और नगरी क्षेत्र में आबादियों को मालिकाना हक देने की पहल से क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगी है। उनका आरोप था कि कांग्रेस इस पहल को पचा नहीं पा रही है और राजनीतिक स्वार्थवश अवरोध पैदा कर रही है।
ज्ञापन में प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में मांग की—
सिरौली कला को किच्छा से अलग रखते हुए दोनों क्षेत्रों में अलग-अलग नगर निकाय चुनाव कराए जाएं।
न्यायालय में लंबित मामले के शीघ्र निस्तारण हेतु प्रभावी पहल की जाए।
लंबित विकास योजनाओं को तुरंत स्वीकृति और क्रियान्वयन दिया जाए।
जुलूस और प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र में पुलिस बल तैनात रहा और कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
नगर निकाय चुनाव को लेकर किच्छा और सिरौली कला में उभरा यह जनआक्रोश आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को किस दिशा में ले जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल जनता की मांग साफ है—विकास बाधित नहीं होना चाहिए और चुनाव प्रक्रिया में अनावश्यक अवरोध समाप्त किए जाएं।




