

रूद्रपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में विधायक शिव अरोड़ा ने जिस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाया, वह केवल एक भूमि विवाद नहीं बल्कि देवभूमि उत्तराखंड की आस्था, न्याय व्यवस्था और शासन-प्रशासन की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। विधायक ने आरोप लगाया कि कुछ भू-माफिया तत्व झूठे एफिडेविट, भ्रामक दस्तावेज़ और गलत साक्ष्य प्रस्तुत कर न केवल प्रशासन को गुमराह कर रहे हैं, बल्कि न्यायालय को भी भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि नजूल भूमि और मंदिर परिसर पर अवैध कब्जा किया जा सके।

आस्था की आड़ में जमीन कब्जा नहीं
रुद्रपुर विधायक शिव अरोड़ा ने चंद्रदेव मंदिर प्रकरण को लेकर स्पष्ट संदेश दिया कि आस्था के नाम पर जमीन कब्जा करने का खेल रुद्रपुर विधानसभा में नहीं चलेगा। उन्होंने केपी गंगवार पर निशाना साधते हुए कहा कि भू-माफिया झूठे शपथपत्र और भ्रामक दस्तावेजों के सहारे नजूल व मंदिर भूमि पर कब्जे का प्रयास कर रहे हैं। विधायक ने चेतावनी दी कि ऐसे तत्वों को किसी भी हाल में सफल नहीं होने दिया जाएगा।
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
शिव अरोड़ा का यह कहना कि करोड़ों की भूमि पर कब्जे की साजिश रची जा रही है, केवल एक राजनीतिक बयान नहीं बल्कि व्यवस्था को चेतावनी है। विशेष रूप से जब बात चंद्र देव मंदिर जैसे धार्मिक स्थल की हो, तो मामला आस्था से जुड़ जाता है। देवभूमि में मंदिरों और सार्वजनिक आस्था स्थलों पर भू-माफिया की नजर कोई नई बात नहीं है, लेकिन इसे कानूनी जामा पहनाकर अंजाम देने का प्रयास निश्चित रूप से खतरनाक प्रवृत्ति है।
इस पूरे प्रकरण में विधायक ने स्पष्ट किया कि भू-माफिया के मंसूबों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। यह संदेश उन ताकतों के लिए है जो न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर स्वयं को वैध साबित करना चाहती हैं। साथ ही यह भी आवश्यक है कि प्रशासन और न्यायपालिका तथ्यों की गहराई से जांच करे, ताकि सत्य सामने आए और आस्था व कानून दोनों की रक्षा हो।
देवभूमि की पहचान केवल पहाड़ों और नदियों से नहीं, बल्कि उसकी नैतिकता और न्यायप्रियता से है। यदि झूठे कागजों के दम पर मंदिरों और सार्वजनिक भूमि पर कब्जे होने लगे, तो यह समाज के लिए घातक होगा। ऐसे में यह लड़ाई केवल एक व्यक्ति या विधायक की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है—भू-माफिया के खिलाफ और सत्य के पक्ष में।




