

इन नए नियमों का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

सरकार का मानना है कि ऊर्जा संसाधनों का संतुलित उपयोग और गैस की समान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इन कदमों की जरूरत है। इसी उद्देश्य से LPG की कीमत, बुकिंग प्रक्रिया और वितरण प्रणाली में बदलाव किए गए हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
1. गैस बुकिंग के नियम में बदलाव
गैस सिलेंडर बुकिंग को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं। अब एक सिलेंडर लेने के तुरंत बाद दूसरा सिलेंडर बुक करना संभव नहीं होगा। इसके लिए बुकिंग के बीच निश्चित अंतराल रखना जरूरी होगा। शहरी इलाकों में यह अंतर लगभग 25 दिन का रखा गया है, जबकि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में इसे बढ़ाकर लगभग 45 दिन कर दिया गया है। सरकार का तर्क है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गैस की खपत अपेक्षाकृत धीमी होती है और इस व्यवस्था से गैस की अनियमित खपत और गलत उपयोग पर रोक लगाई जा सकेगी।
2. साल में सीमित संख्या में ही सिलेंडर
नए नियमों के अनुसार एक परिवार सालभर में सीमित संख्या में ही LPG सिलेंडर ले सकेगा। सामान्य तौर पर एक उपभोक्ता साल में 15 सिलेंडर तक बुक कर सकता है, जिनमें से 12 सिलेंडर पर ही सब्सिडी लागू होती है। इसके अलावा सुरक्षा और नियमन को ध्यान में रखते हुए घर में अधिकतम दो सिलेंडर रखने की अनुमति है।
3. PNG वाले घरों के लिए नया नियम
जिन घरों में पाइप के माध्यम से गैस यानी PNG कनेक्शन उपलब्ध है, उनके लिए भी नियम सख्त किए गए हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को अब LPG सिलेंडर रखने की अनुमति नहीं दी जा रही है। गैस कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि जिन लोगों के पास पहले से पाइप गैस की सुविधा है, उन्हें नया LPG कनेक्शन न दिया जाए। साथ ही जिनके पास दोनों कनेक्शन हैं, उनसे LPG कनेक्शन स्वेच्छा से सरेंडर करने के लिए कहा जा रहा है।
4. गैस सप्लाई व्यवस्था में बदलाव
ऊर्जा संकट की आशंका को देखते हुए सरकार गैस सप्लाई को लेकर भी नई रणनीति पर काम कर रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक परिस्थितियों का सीधा असर गैस की उपलब्धता पर पड़ता है।
इसी कारण सरकार गैस के नए स्रोत तलाशने की कोशिश कर रही है और देश के अंदर उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसके अलावा गैस वितरण व्यवस्था को इस तरह व्यवस्थित किया जा रहा है कि ग्रामीण और जरूरतमंद उपभोक्ताओं को प्राथमिकता मिल सके।




