नै नीताल। लगातार कमजोर पड़ते पश्चिमी विक्षोभ ने मौसम में अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसका असर यह होगा कि तीन पहाड़ी राज्यों में भविष्य में पेयजल संकट, स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव और आजीविका का दंश झेलना पड़ेगा।

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कुमाऊं विश्वविद्यालय के भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के सीनियर फेलो प्रो. पीसी तिवारी और ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के साझा शोध में यह तथ्य सामने आए हैं।पश्चिमी विक्षोभ की उत्पत्ति भू-मध्य सागर में होती है। वह हिमालय तक पहुंचकर उस पर सक्रिय रहता है। पूर्व की ओर आकर हिमालय में शीतकालीन व बसंत कालीन बारिश में सहायक होता है। जलवायु परिवर्तन पर शोध में सामने आया कि पश्चिमी विक्षोभ बीते 10 वर्षों से लगातार कमजोर पड़ रहा है। इस कारण शीतकालीन बारिश 20 से कम होकर सात फीसदी रह गई है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में 15 नवंबर से 15 अप्रैल तक शीत व बसंत ऋतु में 20 से 25 फीसदी और मानसून में 75-80 फीसदी बारिश होती थी। अब शीत व बसंत ऋतु में 5 से 10 फीसदी ही बारिश हो रही है। मानसून में यह 10 फीसदी घटी है। करीब 15 साल पहले तक पश्चिमी हिमालय में नवंबर से अप्रैल तक बारिश होती थी लेकिन अब बारिश बेहद कम हो गई है। इसका सीधा असर खेती और नदियों के जलस्तर पर पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि कमजोर पश्चिमी विक्षोभ से वर्ष 2050 के आसपास सूखा पड़ने की नौबत आएगी। अतिवृष्टि के कारण भूस्खलन की घटनाएं बढ़ेंगी। इससे यहां बसे लोगों को पलायन की मार झेलनी पड़ेगी। तापमान बढ़ने से वनाग्नि की घटनाओं में इजाफा होगा जिससे वन्यजीवों का जीवन भी संकट में आएगा। संवाद

संवाददाता,शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स /उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड)
ऐसे निपट सकते हैं
प्रो. तिवारी के अनुसार जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास करने की जरूरत है। सरकार के साथ ही हमें पानी संरक्षित करने की योजना बनाने की जरूरत है। कार्बन उत्सर्जन कम करने, कम पानी की जरूरत वाली फसलों की खेती करने व जन चेतना जागृत करने की जरूरत है।
जलवायु परिवर्तन से हो रहा पश्चिमी विक्षोभ कमजोर
आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान (एरीज) के वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र सिंह बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन से पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ रहा है। लगातार वाहनों की संख्या बढ़ रही है और पेड़ों का कटान कर भवनों का निर्माण किया जा रहा है। इससे तापमान बढ़ रहा है। मानव की ओर से प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस पर समय रहते नहीं चेते तो भविष्य में खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
फोटो- 15एनटीएल02पी-


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