बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर सभी को चौका दिया है। बात करें आंकड़ों की तो इस बार एनडीए ने 80 से अधिक सीटें ज्यादा अपने खाते में जमा की है।

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इस जीत के बाद अब सरकार गठन और मंत्रिमंडल की तैयारियां जोरों पर है। नीतीश कुमार भाजपा, एलजेपी और अन्य सहयोगी दलों के साथ सरकार बनाएगी। लेकिन इस बीच बिहार में पांच सीट जीतने वाले असदुद्दीन ओवैसी सरकार बनाने का सपना देख रहे हैं। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए ये कहना सही नहीं होगा कि नीतीश कुमार फिर से पलटी मारेंगे।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

नीतीश कुमार को गठबंधन के लिए न्योता

Bihar GOVT Alliance News मिली जानकारी के अनुसार असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने नीतीश कुमार को गठबंधन के लिए न्योता दिया है। एआईएमआईएम बिहार के आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा गया कि अभी भी सरकार बनाने का मौका है। पार्टी का कहना है कि जेडीयू, राजद, कांग्रेस, आईएमआईएम, सीपीआईएमएल, सीपीआईएम मिल जाएं तो सरकार बन सकती है। गौरतलब है कि जेडीयू के पास 85 तो आरजेडी के पास 25 सीटें हैं। वहीं कांग्रेस और एआईएमआईएम ने क्रमश: 6 और 5 सीटों पर कब्जा जमाया है। सीपीआई-एमएल और सीपीआई एम ने 3 सीटों पर जीत हासिल की है। इनका योग 124 होता है, जोकि बिहार में बहुमत के जादुई आंकड़े 122 से दो अधिक है।

जेडीयू के कोटे से दो डिप्टी सीएम और 20 मंत्री

पार्टी ने आगे कहा कि उसका मुख्यमंत्री होगा जबकि जेडीयू के कोटे से दो डिप्टी सीएम और 20 मंत्री बनाए जा सकते हैं। राजद को 6 मंत्री दिए जा सकते हैं तो कांग्रेस के पास दो मंत्री पद होगा। सीपीआईएमएल और सीपीआईएम से एक-एक मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा नीतीश कुमार को 2029 में प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाया जाएगा ओवैसी की पार्टी ने कहा, ‘हम, हमेशा जोड़ने की राजनीति करते हैं, तोड़ने की नहीं। इसीलिए अभी भी मौका है।’

राजद और कांग्रेस ने ठुकरा दिया प्रस्ताव

मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र में खासा प्रभाव रखने वाली इस पार्टी ने 243 विधानसभा सीटों में से 29 पर चुनाव लड़ा। जिन सीटों पर उसने चुनाव लड़ा, उनमें से 24 सीट सीमांचल क्षेत्र की हैं। एआईएमआईएम ने चुनाव से पहले महागठबंधन में शामिल होने की भरसक कोशिश की। लेकिन जब राजद और कांग्रेस ने उसका प्रस्ताव ठुकरा दिया तो ओवैसी की पार्टी ने अकेले लड़ने का फैसला किया। माना जा रहा है कि मुस्लिम वोटों के बिखराव की वजह से भी राजद और कांग्रेस को नुकसान हुआ। सीमांचल में ओवैसी की पार्टी पांच सीटें जीतने में कामयाब रही तो कई पर वह करीबी मुकाबले में हारी।


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