

लैंसडाउन/चोबट्टखाल/यमकेश्वर।
उत्तराखण्ड की पहाड़ी राजनीति में एक नया स्वर उभरता दिखाई दे रहा है। राज्य के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों—लैंसडाउन, चोबट्टखाल और यमकेश्वर—में क्षेत्रीय दल हिमालय क्रांति पार्टी (HKP) के पक्ष में समर्थन की आहट तेज होती दिख रही है। पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं का दावा है कि अब जनता खुलकर क्षेत्रीय विकल्प के साथ खड़ी होने लगी है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, राज्य गठन के वर्षों बाद भी मूल मुद्दे—रोजगार, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य और पारदर्शी शासन—अपेक्षित प्राथमिकता नहीं पा सके। उनका आरोप है कि राष्ट्रीय दलों ने राज्य हितों से अधिक राजनीतिक समीकरणों और सत्ता संतुलन को तरजीह दी। इसी पृष्ठभूमि में हिमालय क्रांति पार्टी स्वयं को एक सशक्त क्षेत्रीय विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि “पहले विकल्प सीमित थे, अब जनता के पास स्पष्ट क्षेत्रीय विकल्प मौजूद है।” उनका दावा है कि गांव-गांव और जनसंपर्क अभियानों के दौरान लोगों ने खुलकर समर्थन और विश्वास व्यक्त किया है।
HKP नेतृत्व का कहना है कि यह विश्वास उनके लिए प्रेरणा के साथ-साथ जिम्मेदारी भी है। पार्टी ने वचन दिया है कि वह ईमानदारी, पारदर्शिता और प्रतिबद्धता के साथ केवल राज्य हित में कार्य करेगी और जनता के भरोसे को कभी टूटने नहीं देगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय असंतोष इसी प्रकार संगठित समर्थन में बदलता है, तो आगामी चुनावी परिदृश्य में नए समीकरण बन सकते हैं। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि उत्तराखण्ड की राजनीति में परिवर्तन की चर्चा अब खुले मंचों तक पहुंच चुकी




