गोवा के नाइट क्लब में लगी आग में उत्तराखंड के नौ लोग जिंदा जल गए। इसमें पिथौरागढ़ के सुरेंद्र सिंह की भी जान चली गई। नियति का खेल देखिए, सुरेंद्र हादसे से ठीक एक हफ्ता पहले ही बेंगलुरु से नौकरी करने गोवा पहुंचे थे।

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जर्मनी में काम कर चुके सुरेंद्र दोबारा विदेश जाने के प्रयास में लगे थे। खटीमा में नया घर भी बना रहे थे, लेकिन आग की विभिषिका ने उनकी जिंदगी और परिवार के सपनों को राख कर दिया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

पिथौरागढ़ शहर से लगे गुरना क्षेत्र के जमराड़ी सिमली गांव के रहने वाले सुरेंद्र लंबे समय से होटल सेक्टर से जुड़े थे। सोमवार को ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में उनके पिता अमर सिंह ने बताया कि सुरेंद्र ने अपनी होटल में नौकरी की शुरुआत बेंगलुरु से की। पेशे से कुक सुरेंद्र अपनी मेहनत की बदौलत जर्मनी तक पहुंचे। चार साल तक विदेश में काम करने के बाद वह घर लौटे।

जर्मनी बसने की थी तैयारी

करीब पांच माह घर पर रुके और फिर जर्मनी जाने के प्रयास में लग गए। इसके लिए उन्होंने वीजा के लिए आवेदन भी किया, लेकिन दस्तावेजों में समस्या के कारण उनका आवेदन रिजेक्ट हो गया। उन्होंने दस्तावेज दुरुस्त कर फिर वीजा के लिए आवेदन किया, जिसमें समय लग रहा था। आसपास के शहरों में रोजगार और उनकी योग्यता के अनुसार वेतन नहीं था। पिता ने बताया कि बेंगलुरु के एक होटल में प्रतिमाह 50 हजार वेतन पर काम करने की बात हुई तो सुरेंद्र चला गया, लेकिन होटल से सुरेंद्र को 40 हजार ही वेतन मिला।

तीन साल पहले ही हुआ विवाह

गोवा हादसे में सुरेंद्र की मौत की जानकारी के बाद उनके पैतृक गांव जमराड़ी सिमली में शोक की लहर है। सामाजिक कार्यकर्ता ललित महर ने बताया कि सुरेंद्र का करीब तीन साल पहले ही मनीषा से विवाह हुआ था। उनकी कोई संतान नहीं है। गांव में मातम पसरा है। माता-पिता समेत अन्य परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। सुरेंद्र चारों भाइयों में तीसरे नंबर के थे। दो भाई टैक्सी संचालन का कार्य करते हैं। एक भाई होटल सेक्टर से ही जुड़ा है।

मनीषा और सुरेंद्र ने देखा था घर का सपना

गोवा हादसे ने एक हंसते खेलते दंपति के सपने चकनाचूर कर दिए। मनीषा यकीन नहीं कर पा रही है कि अब पति सुरेंद्र इस दुनिया में नहीं रहे। दोनों ने मिलकर शहर में नए आशियाने का सपना साथ देखा था। खटीमा के महोलिया में घर बना रहे थे। सुरेंद्र के पिता अमर सिंह ने बताया कि करीब एक वर्ष से भवन निर्माण का कार्य चल रहा है। वर्तमान में भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। खिड़की-दरवाजे सहित अन्य काम होना शेष है। केवल एक कमरा ही पूरी बनाया है। बहू मनीषा खटीमा में निर्माणाधीन मकान का काम देख रही थी।


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