

कहा जा रहा है कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने उनकी लोकेशन ट्रैक की थी, लेकिन उन्हें कैसे खोजा गया- इस पर पुख्ता जानकारी कम है. इसी वजह से कई दावे और साजिश की कहानियां वायरल हो रही हैं.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
ट्रंप और नेतन्याहू का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अलग-अलग बयानों में कहा कि यह कार्रवाई ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए की गई. ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर खामेनेई को ‘दुनिया के इतिहास का सबसे बुरा व्यक्ति’ बताया. उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर साजिश की थ्योरी की बाढ़ आ गई.
‘टूथ फेयरी’ थ्योरी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने दावा किया कि मोसाद ने ईरान में डॉक्टर और दंत चिकित्सक के रूप में अपने एजेंट भेजे. आरोप है कि इन लोगों ने अहम सैन्य अधिकारियों के दांतों में इलाज के दौरान ट्रैकिंग चिप लगा दी. कुछ पोस्ट में यह भी कहा गया कि गैस्ट्रो डॉक्टरों ने भी इसी तरह के डिवाइस शरीर में लगाए. हालांकि, इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिला है.
करीबी दायरे में ‘जासूस’ की थ्योरी
रेडिट पर एक थ्रेड में दावा किया गया कि ईरान के जनरल और कुद्स फोर्स के कमांडर इस्माइल क़ानी मोसाद और सीआईए के लिए काम कर रहे थे. पोस्ट में कहा गया कि क़ानी हमले से ठीक पहले खामेनेई के घर पर थे और हमले से पहले वहां से निकल गए. कुछ खबरों में उनके मोसाद से संबंधों की जांच या गिरफ्तारी की बात भी कही गई, लेकिन यह दावा अभी तक पूरी तरह साबित नहीं हुआ है.
ट्रैफिक कैमरों की हैकिंग
सोशल मीडिया पर यह भी कहा गया कि इजरायल ने कई सालों से ईरान के ट्रैफिक कैमरे हैक कर रखे थे और इन्हीं से खामेनेई की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी. बाद में अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में इस दावे की पुष्टि की गई. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान के लगभग सभी ट्रैफिक कैमरे वर्षों से हैक थे और उनका डेटा तेल अवीव और दक्षिणी इजरायल के सर्वरों तक भेजा जा रहा था. एक खास कैमरा एंगल से यह भी पता चलता था कि बॉडीगार्ड अपनी गाड़ियां कहां खड़ी करते हैं और रोजमर्रा की गतिविधियां कैसी हैं.
प्रेयर ऐप ‘बादे सबा’ की हैकिंग
एक और दावा था कि इजरायल ने ईरान के लोकप्रिय प्रेयर टाइम ऐप ‘बादे सबा’ को हैक कर लिया. इस ऐप के 50 लाख से ज्यादा डाउनलोड बताए गए हैं. रॉयटर्स के अनुसार, इस ऐप पर ‘हिसाब का समय आ गया है’ जैसे संदेश दिखाए गए और सेना से हथियार छोड़ने की अपील की गई. ईरान की प्रमुख मीडिया वेबसाइट्स- IRNA, ISNA, Tabnak और Asr-e Iran को भी हैक किए जाने की पुष्टि हुई है. इसे मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा बताया गया.
कौन सी थ्योरी सही, कौन नहीं
जहां ट्रैफिक कैमरों की हैकिंग और प्रेयर ऐप पर साइबर हमले की पुष्टि हो चुकी है, वहीं दांतों में चिप लगाने और करीबी अधिकारी के जासूस होने वाली थ्योरी अभी सिर्फ दावे ही मानी जा रही हैं. खामेनेई को कैसे ट्रैक किया गया, इस पर अभी भी पूरी और आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
इस हमले में अली खामेनेई के साथ ही कई शीर्ष अधिकारी मारे गए। यह हमला रात में नहीं, बल्कि दिन के उजाले में किया गया था, जिसकी ईरान में किसी ने शायद ही कल्पना की होगी। लेकिन इजरायल और अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पास 86 साल के खामेनेई के बारे में हर जानकारी थी। उन्हें यह तक पता था कि खामेनेई अपने ऑफिस में ठीक किस समय होंगे और उनके साथ कौन-कौन आएगा।
तेहरान के सभी ट्रैफिक कैमरे थे हैक
फाइनेंशियल टाइम्स ने मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों के हवाले से बताया है कि इजरायली इंटेलिजेंस ने तेहरान के लगभग सभी ट्रैफिक कैमरों को सालों से हैक कर लिया था। उसकी तस्वीरें एन्क्रिप्ट करके तेल अवीव और दक्षिणी इजरायल के सर्वर पर भेजी जा रही थीं। इसमें एक कैमरे का एंगल बहुत काम का साबित हुआ, जिससे पाश्चर स्ट्रीट में खामेनेई के कड़े सुरक्षा वाले कंपाउंड के आम हिस्सा की झलक मिली।
इससे यह पता लगाने में मदद मिली कि सीनियर अधिकारी, वफादार बॉडीगार्ड अपनी कार कहां पार्क करते हैं। इस ऑपरेशन में आर्टिफिशिएल इंटेलिजेंस की भी मदद ली गई, जिसके एल्गोदिरम ने इन सिक्योरिटी गार्ड के पते, ड्यूटी के घंटे, काम पर जाने के रास्ते के साथ ही यह भी पता लगाया कि उन्हें किसकी सुरक्षा और ट्रांसपोर्ट का काम सौंपा गया था।
तेहरान के चप्पे-चप्पे की जानकारी
एक इजरायली इंटेलिजेंस अधिकारी ने फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में कहा, ‘हम तेहरान को वैसे ही जानते थे जैसे यरुशलम को जानते हैं। जब आप किसी जगह को उतनी ही अच्छी जगह से जानते हों जितना आप उस गली को जानते हैं, जहां आप बड़े हुए हैं, तो आप एक भी ऐसी चीज नोटिस करते हैं, जो जगह से हटकर हो।’
इजरायल ने ईरान में अपनी खुफिया पकड़ पिछले साल जून में ही दिखा दी थी, जब 12 दिनों के युद्ध की शुरुआत में ही इसने एक दर्जन से ज्यादा ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों और शीर्ष सैन्य अधिकारियों की हत्या कर दी। वहीं, साइबर हमलों, कम रेंज के ड्रोन और ईरान के बाहर से दागे गए हथियारों से ईरान के एयर डिफेंस को नाकाम कर दिया। एक अधिकारी ने कहा, ‘हमने पहले उनकी आंखें ली थीं।’
इजरायल की स्पैरो मिसाइल
इजरायल ने पहले जून और अब ताजा हमले में स्पैरो नाम की खास मिसाइल का इस्तेमाल किया, जो 1000 किमी की दूरी पर मौजूद डाइनिंग टेबल जितने छोटे लक्ष्य को निशाना बना सकती है। यह मिसाइल ईरान के किसी भी एरियल डिफेंस सिस्टम की पहुंच से बहुत दूर है।
खामेनेई को शुरुआत में ही क्यों मारा?
इजरायली अधिकारियों के अनुसार युद्ध शुरुआत में ही खामेनेई को मारने का फैसला इसलिए किया गया क्योंकि बाद में उन्हें ढूढ़ना बहुत मुश्किल होता। ईरानी उन्हें बचाने के लिए सुरक्षित अंडरग्राउंड बंकरों में भेज देते। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि तनाव के समय में खामेनेई का बंकर में न होना अजीब था। उनके पास दो बंकर थे। अगर वे उसमें होते तो इजरायल अपने पास मौजूद बमों से उन तक नहीं पहुंच पाता। मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि ईरान पर हमले की योजना महीनों पहले ही बनी थी, लेकिन ऑपरेशन में तब बदलाव किया गया गया जब अमेरिकी और इजरायली इंटेलिजेंस ने कन्फर्म किया कि खामेनेई और उनके सीनियर अधिकारी शनिवार सुबह कंपाउंड में मौजूद होंगे।




