हमारी संस्कृति, हमारी पहचान — उत्तरायणी (घुघुतिया त्यार) महोत्सव 2026 : रुद्रपुर में लोकसंस्कृति का विराट उत्सव!शैल सांस्कृतिक समिति (शैल परिषद),

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रुद्रपुर,उत्तराखंड की आत्मा उसकी लोकसंस्कृति, लोकपर्व और सामूहिक चेतना में बसती है। पर्व केवल तिथि नहीं होते, वे पीढ़ियों को जोड़ने वाले सेतु होते हैं। ऐसे ही पर्वों में उत्तरायणी, मकर संक्रांति और घुघुतिया त्यार का विशेष स्थान है, जो न केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है, बल्कि लोकविश्वास, पारिवारिक एकजुटता और सांस्कृतिक स्मृतियों को पुनर्जीवित करता है।
इसी परंपरा को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से शैल सांस्कृतिक समिति (शैल परिषद), रुद्रपुर द्वारा 13 व 14 जनवरी 2026 को उत्तरायणी (घुघुतिया त्यार) महोत्सव 2026 का भव्य आयोजन शैल भवन, गंगापुर रोड (मोदी मैदान के निकट) किया जा रहा है।
यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान, अस्मिता और सांस्कृतिक स्वाभिमान का उत्सव है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


तैयारियों का दौर: उत्साह, ऊर्जा और ऐतिहासिक भीड़ की संभावना
महोत्सव को लेकर तैयारियाँ पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। 21 दिसंबर 2025 को आयोजित हुई तैयारी बैठक में यह स्पष्ट हुआ कि इस वर्ष का आयोजन अब तक का सबसे भव्य और ऐतिहासिक होने जा रहा है।
आयोजन समिति के अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में इस बार दर्शकों की रिकॉर्ड भीड़ आने की संभावना है। इसी को देखते हुए:
स्टॉलों की संख्या बढ़ाई जा रही है
व्यापारिक एवं सांस्कृतिक स्टॉल बुकिंग के लिए लंबी कतारें लग चुकी हैं
कार्यक्रम की समय-सारिणी को और अधिक व्यवस्थित किया गया है
सुरक्षा, पार्किंग, स्वच्छता और दर्शक सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है
यह स्पष्ट संकेत है कि उत्तरायणी महोत्सव अब केवल एक स्थानीय आयोजन नहीं, बल्कि रुद्रपुर और तराई क्षेत्र का सबसे बड़ा पर्वतीय सांस्कृतिक मंच बन चुका है।
पहले दिन की संध्या: लोकगायन के दिग्गजों की प्रस्तुति
13 जनवरी 2026, महोत्सव का पहला दिन, लोकसंगीत प्रेमियों के लिए यादगार होने वाला है।
इस दिन मंच पर उत्तराखंड के ख्यातिप्राप्त लोक कलाकार अपनी आवाज़ से पहाड़ों की खुशबू बिखेरेंगे:
लोकगायक गजेन्द्र राणा
लोकगायिका डॉ. कुसुम भट्ट
विक्रम रावत
जगदीश भट्ट
राजेन्द्र बिष्ट
इन कलाकारों की प्रस्तुतियाँ कुमाऊँनी और गढ़वाली लोकगीतों के माध्यम से श्रोताओं को सीधे अपनी जड़ों से जोड़ेगी।
कार्यक्रम का संचालन एवं निर्देशन:
निर्देशन एवं संचालन: सुरू रावत
नृत्य निर्देशन: अक्षय राणा
संगीत निर्देशन: विमल रावत
लय-ताल वादन: पवन रावत, पंकज बणई, शिवम शर्मा
यह संयोजन यह सुनिश्चित करता है कि कार्यक्रम कलात्मक गुणवत्ता और लोकपरंपरा—दोनों का संतुलन बनाए रखे।
दूसरा दिन: बच्चों के माध्यम से संस्कृति का हस्तांतरण
14 जनवरी 2026, महोत्सव का दूसरा दिन, भविष्य की पीढ़ी को समर्पित होगा।
इस दिन क्षेत्र के चयनित विद्यालयों के छात्र-छात्राएं:
पर्वतीय संस्कृति पर आधारित लोकनृत्य
देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियाँ
पारंपरिक वेशभूषा में सांस्कृतिक झलक
प्रस्तुत करेंगे।
साथ ही दोनों ही दिनों में छोलिया नृत्य का मनमोहक प्रदर्शन दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित करेगा, जो पर्वतीय वीरता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।
मेले का आकर्षण: स्वाद, शिल्प और संस्कार
उत्तरायणी महोत्सव केवल मंचीय कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। मेले में:
बच्चों के लिए झूले व मनोरंजन साधन
पर्वतीय उत्पादों की प्रदर्शनी
ऊनी वस्त्र, हस्तशिल्प, जड़ी-बूटी उत्पाद
पारंपरिक पर्वतीय व्यंजन—भट्ट की चुड़कानी, झंगोरे की खीर, सिंगल, गहत आदि
उपलब्ध होंगे।
यह मेला स्थानीय कारीगरों, महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों और छोटे व्यापारियों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का मंच भी बनेगा।
स्टॉल बुकिंग: अवसर अभी भी उपलब्ध
आयोजन समिति ने स्पष्ट किया है कि:
स्टॉल बुकिंग पहले आओ–पहले पाओ के आधार पर होगी
इस वर्ष स्टॉलों की संख्या बढ़ाई जा रही है
इच्छुक संस्थान, व्यापारी और उद्यमी शीघ्र संपर्क करें
संपर्क सूत्र:
 9412986263
 9412036280
 8077832310
 9760098600
 7088222098
 8979649722
नए कलाकारों के लिए सुनहरा मंच
इस वर्ष शैल सांस्कृतिक समिति ने एक नई पहल की है।
यदि आपके भीतर लोकगायन, नृत्य, वादन या किसी भी सांस्कृतिक कला का हुनर है, तो:
आप शैल परिषद के मंच से स्टार और सुपरस्टार बन सकते हैं
आपकी परफॉर्मेंस के आधार पर चयन किया जाएगा
इच्छुक प्रतिभाएं सीधे समिति से संपर्क कर सकती हैं
यह पहल स्थानीय प्रतिभाओं को पहचान देने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।
अध्यक्ष गोपाल सिंह पटवाल का बयान
शैल सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष गोपाल सिंह पटवाल ने कहा:
“उत्तरायणी महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी लोकसंस्कृति की आत्मा है। आज के दौर में जब नई पीढ़ी अपनी जड़ों से दूर होती जा रही है, ऐसे आयोजन उन्हें अपनी पहचान से जोड़ने का कार्य करते हैं। इस बार हम चाहते हैं कि रुद्रपुर उत्तराखंड की संस्कृति का केंद्र बने। मैं शैल परिषद से जुड़े सभी लोगों, बुद्धिजीवियों और युवाओं से अपील करता हूँ कि वे आयोजन को और भव्य बनाने के लिए अपने सुझाव दें।”
उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृति का संरक्षण तभी संभव है जब समाज स्वयं आगे आए।
आयोजन समिति प्रमुख दिनेश बम का बयान
कार्यक्रम के प्रमुख संयोजक दिनेश बम ने कहा:
“उत्तरायणी महोत्सव 2026 को लेकर लोगों में जो उत्साह दिख रहा है, वह अभूतपूर्व है। स्टॉल बुकिंग, कलाकारों की भागीदारी और दर्शकों की रुचि यह दर्शाती है कि यह आयोजन रुद्रपुर की पहचान बन चुका है। हमारी पूरी टीम दिन-रात मेहनत कर रही है ताकि हर दर्शक को एक यादगार अनुभव मिले। हम प्रवासी पर्वतीय समाज से भी सपरिवार उपस्थित होने की अपील करते हैं।”
उन्होंने यह भी बताया कि सुरक्षा, अनुशासन और पारिवारिक वातावरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
संस्कृति बचेगी, तभी पहचान बचेगी
उत्तरायणी (घुघुतिया त्यार) महोत्सव 2026 यह संदेश देता है कि विकास और आधुनिकता के साथ संस्कृति का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।
यह आयोजन रुद्रपुर में न केवल पर्वतीय समाज को जोड़ता है, बल्कि पूरे उत्तराखंड की सांस्कृतिक चेतना को एक मंच पर लाता है।
हमारी संस्कृति हमारी पहचान है।
और इस पहचान को जीवित रखने का संकल्प ही उत्तरायणी महोत्सव की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
जय उत्तराखंड।


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