

अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने इस खतरे को दुनिया के सामने रखा है. उन्होंने कई देशों के साथ पाकिस्तान का नाम लेकर कहा है कि पाकिस्तान का न्यूक्लियर प्रोग्राम अमेरिका के लिए खतरा है. ये दावा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान की ‘न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन’ दुनिया के बाकी परमाणु संपन्न देशों से काफी अलग और बेलगाम है. इसका सबसे बड़ा कारण है इसकी ‘फर्स्ट यूज’ पॉलिसी और ‘फुल स्पेक्ट्रम डिटरेंस’.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
1. ‘नो फर्स्ट यूज’ पॉलिसी का न होना
भारत की नीति साफ है कि हम पहले परमाणु हमला नहीं करेंगे. लेकिन पाकिस्तान की डॉक्ट्रिन में ‘फर्स्ट यूज’ का विकल्प खुला है. इसका मतलब है कि अगर पाकिस्तान को लगता है कि वह पारंपरिक युद्ध (Conventional War) में हार रहा है या उसकी क्षेत्रीय अखंडता खतरे में है, तो वह पहले परमाणु बटन दबा सकता है. यह अनिश्चितता युद्ध को किसी भी पल महाविनाश में बदल सकती है.
2. टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन्स
पाकिस्तान ने छोटे आकार के परमाणु हथियार यानी ‘टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन्स’ विकसित किए हैं. इनका उद्देश्य बड़े शहरों को तबाह करना नहीं, बल्कि युद्ध के मैदान में आती हुई दुश्मन की सेना को रोकना है. छोटे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने का सीमा नहीं होती है. ऐसे में एक बार युद्ध के मैदान में छोटा परमाणु धमाका हुआ, तो उसे बड़े परमाणु युद्ध में बदलने से रोकना नामुमकिन हो जाएगा.
3. ‘फुल स्पेक्ट्रम डिटरेंस’ का जुआ
पाकिस्तान का दावा है कि उसके पास हर तरह के लक्ष्य के लिए परमाणु हथियार हैं, चाहे वह लंबी दूरी की मिसाइल हो या छोटे रॉकेट. वह परमाणु हथियारों को केवल ‘आखिरी ऑप्शन’ नहीं मानता, बल्कि उन्हें अपनी रक्षा नीति के केंद्र में रखता है. ये मानसिकता महायुद्ध के डर को खत्म कर देती है और छोटे संघर्षों को बढ़ावा देती है.
4. कमांड और कंट्रोल का जोखिम
पाकिस्तान की परमाणु नीति का सबसे डरावना पहलू यह है कि वहां की सेना का इन हथियारों पर सीधा नियंत्रण है.
पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता और कट्टरपंथ के प्रभाव को देखते हुए दुनिया को डर है कि कहीं ये हथियार या इनकी तकनीक किसी आतंकी संगठन के हाथ न लग जाए.
युद्ध की स्थिति में छोटे परमाणु हथियारों को चलाने का अधिकार निचले स्तर के कमांडरों को दिया जा सकता है, जिससे गलती से परमाणु युद्ध शुरू होने का खतरा बढ़ जाता है.
‘प्रॉक्सी वॉर’ को ढाल बनाना
पाकिस्तान अपनी परमाणु शक्ति का इस्तेमाल एक ‘सुरक्षा कवच’ के रूप में करता है. उसे लगता है कि उसके पास परमाणु बम है, इसलिए वो भारत के खिलाफ आतंकवाद का इस्तेमाल कर सकता है और भारत बड़े स्तर पर पलटवार नहीं करेगा क्योंकि बात परमाणु युद्ध तक पहुंच जाएगी.




