

रुद्रपुर। पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के खिलाफ कोतवाली में एफआईआर दर्ज होने के बाद बुधवार को शहर का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया। मुकदमा दर्ज होने के कुछ ही घंटों बादफ़ पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने मीडिया के सामने आकर लाइव पत्रकार वार्ता की और अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज कराया गया मुकदमा राजनीतिक दुर्भावना और छवि धूमिल करने की साजिश का हिस्सा है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
पहले मुकदमा दर्ज होना और उसके तुरंत बाद पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल का सरकारी गनर हटाया जाना महज संयोग नहीं माना जा रहा। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इसे किसी बड़ी कार्रवाई की पूर्व तैयारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आमतौर पर सुरक्षा हटाना प्रशासन की गंभीर असहमति या संभावित दबाव रणनीति का हिस्सा माना जाता है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या यह कदम निष्पक्ष कानून व्यवस्था का हिस्सा है या फिर किसी सुनियोजित राजनीतिक साजिश की भूमिका तैयार की जा रही है। पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति में हलचल तेज कर दी
गौरतलब है कि रुद्रपुर की पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष ने पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल पर अभद्र टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए कोतवाली परिसर में धरना दिया था। धरने के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि राजकुमार ठुकराल ने सार्वजनिक और निजी स्तर पर उनके प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया, जिससे उनकी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। पूर्व पालिकाध्यक्ष ने इसे महिला सम्मान से जोड़ते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की।
कोतवाली परिसर में धरने पर बैठी पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष के समर्थन में कुछ स्थानीय नेता और समर्थक भी पहुंचे, जिससे पुलिस पर दबाव बढ़ा। काफी देर तक चले धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी।
एफआईआर दर्ज होने के बाद आयोजित पत्रकार वार्ता में राजकुमार ठुकराल ने कहा कि उन्होंने कभी भी किसी महिला के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैं कानून का सम्मान करने वाला व्यक्ति हूं। मेरे राजनीतिक जीवन में ऐसे किसी कृत्य का कोई उदाहरण नहीं मिलता। यह पूरा मामला मुझे बदनाम करने और मेरी राजनीतिक सक्रियता पर ब्रेक लगाने के लिए गढ़ा गया है।”
ठुकराल ने यह भी कहा कि यदि कोई जांच होती है तो वे उसमें पूरा सहयोग करेंगे और सच जनता के सामने आएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि “अगर यह मामला इतना गंभीर था तो इसे राजनीतिक रंग क्यों दिया गया?” साथ ही उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर माहौल खराब कर शहर की शांति भंग करना चाहते हैं।
दूसरी ओर, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अपने आरोपों पर कायम हैं। उनका कहना है कि यह मामला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि नारी सम्मान और गरिमा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे आंदोलन को और तेज करेंगी।
फिलहाल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के बाद मामला जांच के दायरे में है। शहर में यह प्रकरण चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की निगाहें अब पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह मामला रुद्रपुर की राजनीति में और उबाल ला सकता है।
पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने मीना शर्मा के धरने को लेकर गंभीर संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में यह धरना हुआ, उससे कई सवाल खड़े होते हैं। ठुकराल का आरोप है कि यह कोई स्वतःस्फूर्त विरोध नहीं था, बल्कि कहीं न कहीं से संयोजित और पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की भूमिका तटस्थ न होकर संदिग्ध नजर आ रही है। पूर्व विधायक ने दावा किया कि पूरे घटनाक्रम का उद्देश्य उनकी छवि धूमिल करना और राजनीतिक रूप से उन्हें कमजोर करना है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने आना जरूरी है।
नारायण हॉस्पिटल में दिया गया पूरी विधायक राजकुमार ठुकराल का बयान
पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनके खिलाफ जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नगर निगम चुनाव के समय उनसे समर्थन मांगा था, लेकिन जब उन्हें वास्तव में सहयोग और सुरक्षा की आवश्यकता पड़ी, तब स्थानीय स्तर पर मिली सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था हटा दी गई। एसएससी मणिकांत मिश्रा के माध्यम से दी गई सुरक्षा और सहयोग भी शासन-प्रशासन के स्तर पर समाप्त कर दिया गया, जिसमें एसडीएम की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
राजकुमार ठुकराल ने कहा कि मीना शर्मा के धरना-प्रदर्शन और वीडियो के कारण उनकी बुजुर्ग मां की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल अत्यधिक बढ़ गया, जिसके चलते उन्हें नारायण हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने भावुक होकर कहा कि यह केवल राजनीतिक संघर्ष नहीं, बल्कि एक परिवार के स्वास्थ्य और सम्मान का प्रश्न बन चुका है।
ठुकराल ने दो टूक कहा कि उन्होंने कभी भी मीना शर्मा के खिलाफ किसी प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक शब्द तक नहीं बोला। वे उन्हें देवी स्वरूप मानते हैं और मानवीय स्तर पर उनकी मां स्वयं जाकर माफी भी मांग चुकी हैं। इसके बावजूद उन पर लगातार आरोप लगाना अमानवीय है। उन्होंने समाज से अपील की कि साजिशों को पहचाना जाए और न्याय राजकुमार ठुकराल को मिले, क्योंकि पीड़ा और अन्याय वही झेल रहे हैं।




