प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सुशीला कार्की को नेपाल के अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने पर बधाई दी. एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा कि नेपाल की अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण करने पर माननीय सुशीला कार्की जी को हार्दिक बधाई.

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पीएम मोदी ने कहा कि भारत नेपाल के भाइयों और बहनों की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. बता दें, भारत और नेपाल 1751 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं (5 भारतीय राज्यों – सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में). भारत- नेपाल संबंध लोगों के बीच गहरे संबंधों के साथ-साथ धर्म, भाषा और संस्कृति में समानताओं द्वारा परिभाषित होते हैं। बता दें कि भारत की पड़ोसी प्रथम नीति के अनुरूप प्रधानमंत्री मोदी मई 2014 से पांच बार नेपाल की यात्रा कर चुके हैं तथा नेपाल के प्रधानमंत्रियों ने मई 2014 से दस बार भारत की यात्रा की है .

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

नेपाल में मार्च, 2026 में होंगे चुनाव

इससे पहले नेपाल की संसद को शुक्रवार देर रात औपचारिक रूप से भंग कर दिया गया और 5 मार्च, 2026 को नए चुनाव निर्धारित किए गए. इसके कुछ ही घंटों बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को देश के नए अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई. निर्णय की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि कार्की द्वारा रात्रि 11 बजे बुलाई गई पहली कैबिनेट बैठक में विघटन को मंजूरी दी गई जिससे 6 महीने की संक्रमणकालीन सरकार की शुरुआत हुई जिसका काम देश को चुनावों की ओर ले जाना है. बता दें कि काठमांडू स्थित राष्ट्रपति निवास में शपथ लेने वाली कार्की नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं.

राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि नये मंत्रिमंडल को व्यवस्था बहाल करने तथा अगले वर्ष 5 मार्च को होने वाले संघीय संसद के चुनावों के लिए जमीन तैयार करने का कार्य सौंपा गया है. उनके शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर नेपाल में अंतरिम सरकार के गठन का स्वागत किया और आशा व्यक्त की कि यह कदम इस हिमालयी राष्ट्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने में मदद करेगा. अपनी प्रतिक्रिया में विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत दोनों देशों और लोगों की भलाई और समृद्धि के लिए नेपाल के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा.

राजनीतिक उथल-पुथल के बाद आया बदलाव

पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को सोशल मीडिया प्रतिबंधों के खिलाफ उठे भारी विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा था। विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई और कई युवा प्रदर्शनकारी मारे गए, जिससे देशभर में आक्रोश फैल गया। इसी बीच, नेपाल के Gen Z आंदोलन और हामी नेपाल NGO के समर्थन से सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंपा गया।

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इन तीन शर्तों पर बनी सरकार

सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंपे जाने से पहले हामी नेपाल संगठन ने तीन प्रमुख शर्तें रखीं, जिन्हें कार्की ने स्वीकार किया-

  • मौजूदा संघीय संसद को भंग करना – 2022 में निर्वाचित सभी सांसदों का कार्यकाल समाप्त।
  • प्रदर्शनकारियों की मौतों की न्यायिक जांच – 8-9 सितंबर के हिंसक विरोध में मारे गए युवाओं के लिए निष्पक्ष जांच आयोग बनेगा।
  • ओली सरकार की संपत्ति की जांच – पूर्व मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की संपत्ति की न्यायिक समीक्षा होगी।

भारत-नेपाल संबंधों पर प्रभाव

भारत ने हमेशा नेपाल के साथ लोकतांत्रिक और विकासशील साझेदारी को प्राथमिकता दी है। सुशीला कार्की की नियुक्ति पर भारत की सकारात्मक प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि दक्षिण एशिया में स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को भारत समर्थन देता रहेगा। भारत ने यह भी कहा कि वह नेपाल के लोगों की भलाई, शांति और समृद्धि के लिए हरसंभव सहयोग करता रहेगा।

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छह महीने में होंगे नए चुनाव

सुशीला कार्की को नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शपथ दिलाई और उन्हें छह महीने के भीतर नए संसदीय चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी है।


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