

प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान क्षेत्र में तेजी से बढ़ते तनाव, आम नागरिकों की मौत और सिटीजन इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति पूरे क्षेत्र की स्थिरता और शांति के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

- प्रधानमंत्री ने इस दौरान यह भी स्पष्ट किया कि संकट की स्थिति में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनकी सलामती भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके साथ ही उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति और आवश्यक वस्तुओं के बिना रुकावट आवागमन को भी भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
- बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थन करता है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि मौजूदा तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीति ही सबसे प्रभावी रास्ता है।
- प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जटिल अंतरराष्ट्रीय संकटों का समाधान बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए ही संभव है और सभी पक्षों को इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ने बढ़ाई भारत की टेंशनइससे पहले भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के बीच बातचीत हुई। भारत होर्मुज से अपने व्यापारिक जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए ईरान के संपर्क में भारत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रणनीतिक जहाजरानी मार्ग से भारतीय ध्वज वाले लगभग 28 व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने को लेकर ईरान के साथ संपर्क में है। अमेरिका और इजराइल के साथ संघर्ष के बीच ईरान ने इस मार्ग को आंशिक रूप से अवरुद्ध कर दिया है।
जयशंकर की बातचीत का क्या नतीजा निकला?विदेश मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष के बीच हुई बातचीत के दौरान जहाजरानी की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित मुद्दे उठे थे। पता चला है कि ईरान ने पिछले चार-पांच दिन में भारतीय ध्वज वाले किसी भी वाणिज्यिक टैंकर को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं दी है।
फॉलोअप प्रश्न
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से पीएम मोदी की बातचीत का मुख्य एजेंडा क्या था?
भारत ने होर्मुज जलसंधि में जहाजों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए हैं?
पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के लिए क्या अपील की?
ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष का भारत पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?




