

घटना कैसे हुई?9 दिसंबर की शाम 6 से 7 बजे के बीच, देहरादून के सेलाकुई क्षेत्र में एंजेल चकमा (Jigyasa University के फाइनल ईयर MBA छात्र) और उनके छोटे भाई माइकल चकमा (Uttaranchal University के छात्र) किराना सामान खरीदने निकले थे. इसी दौरान शराब के नशे में धुत कुछ स्थानीय युवकों के समूह ने दोनों भाइयों पर नस्लीय टिप्पणियां और शारीरिक रूप-रंग पर अपमानजनक बातें कही. जब दोनों ने इसका विरोध किया, तो स्थिति हिंसक हो गई.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
हिंसा इतनी बढ़ गई कि माइकल को सिर पर भारी चोट पहुंचाई गई और एंजेल को गले और पेट में चाकू मारा गया. एंजेल को गंभीर हालत में ICU में भर्ती कराया गया, लेकिन शुक्रवार को लंबे इलाज के बाद उनकी मौत हो गई.
शव त्रिपुरा लाया गया
शनिवार को एंजेल का पार्थिव शरीर दिल्ली होते हुए अगरतला लाया गया, जहां परिवारजन, YTF (Youth Tipra Federation) और TISF (Tribal Indigenous Students’ Federation) के नेताओं और बड़ी संख्या में लोगों ने एयरपोर्ट पर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी. इसके बाद शव को नंदननगर स्थित घर ले जाया गया. वहां भी लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा. फिर अंतिम संस्कार के लिए उन्हें उनके मूल गांव, उनाकोटी जिले ले जाया गया।
राज्य में गुस्सा, कड़ी कार्रवाई की मांग
इस अमानवीय हमले ने पूरे उत्तर-पूर्व में आक्रोश पैदा कर दिया है. पीड़ित परिवार ने हमलावरों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है. छात्र संगठनों ने भी इस घटना को नस्लीय भेदभाव की कड़ी मिसाल बताते हुए केंद्र सरकार से ‘उत्तर-पूर्व के युवाओं के खिलाफ देश में फैले नस्लीय उत्पीड़न को रोकने के लिए ठोस कदम’ उठाने की अपील की है.
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह घटना उत्तर-पूर्व के छात्रों और युवाओं के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में किए जाने वाले नस्लीय व्यवहार की आव recurring समस्या को उजागर करती है.




