उत्तरायणी महोत्सव की चकाचौंध में दबा महिला संघर्ष का सवाल

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रुद्रपुर/देहरादून।इस वर्ष उत्तरायणी महोत्सव उत्तराखंड से लेकर दिल्ली–मुंबई तक भव्य आयोजनों, राजनीतिक उपस्थिति और मंचीय भाषणों के साथ मनाया गया। हर मंच पर नेताओं का स्वागत हुआ, तस्वीरें खिंचीं और चंदा जुटाया गया, लेकिन इसी चमक-दमक के बीच एक अहम सवाल हाशिये पर चला गया—महिला अधिकारों और न्याय के लिए संघर्षरत ज्योति अधिकारी के आंदोलन पर चुप्पी।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


अंकित भंडारी प्रकरण और कशिश हत्याकांड को लेकर सीबीआई जांच की घोषणा किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उत्तराखंड की हजारों महिलाओं के लंबे संघर्ष की परिणति मानी जा रही है। इस संघर्ष में उत्तराखंड क्रांति दल सहित कई सामाजिक संगठनों और आम पहाड़ी महिलाओं की भूमिका रही। बावजूद इसके, उत्तरायणी जैसे सांस्कृतिक मंचों पर न इन मामलों की चर्चा हुई, न जल–जंगल–जमीन, स्थाई राजधानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, पलायन और महिला सशक्तिकरण जैसे मूल प्रश्नों पर संवाद।
ज्योति अधिकारी द्वारा उठाए गए सवालों और उनके आक्रामक तेवरों पर बहस के बजाय मुकदमों का रास्ता अपनाया गया, जिससे भय का माहौल बनने की बात कही जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सवाल उठाने की कीमत महिलाओं को चुकानी पड़ रही है, जिससे आंदोलनों के कमजोर पड़ने का खतरा है।

जेल से रिहाई के बाद ज्योति अधिकारी की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती
हल्द्वानी की चर्चित ब्लॉगर और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहने वाली ज्योति अधिकारी की तबीयत जेल से रिहाई के अगले ही दिन बिगड़ गई। उन्हें 14 जनवरी की देर रात जेल से रिहा किया गया था, जबकि 15 जनवरी को अचानक स्वास्थ्य खराब होने पर परिजन उन्हें आनन-फानन में अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका उपचार जारी है।
ज्योति अधिकारी का आरोप है कि जेल में उनके साथ मानवीय व्यवहार नहीं किया गया। उनका कहना है कि उन्हें समय पर जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं कराई गईं और न ही भोजन की उचित व्यवस्था थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल में दिया गया भोजन खाने के बाद उनकी तबीयत और अधिक खराब हो गई, जिसका असर रिहाई के बाद भी बना रहा।
परिजनों के अनुसार, रिहाई के बाद ज्योति की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। कमजोरी, चक्कर और असहजता बढ़ने पर बिना समय गंवाए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर ज्योति अधिकारी ने कहा कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई बदले की भावना से प्रेरित थी। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि उनके किसी बयान या शब्दों से किसी की धार्मिक या सामाजिक भावनाएं आहत हुई हों, तो वह इसके लिए सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगती हैं। ज्योति का कहना है कि उनके कथनों को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया, फिर भी सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए वह माफी मांगने में कोई संकोच नहीं करतीं।
फिलहाल ज्योति अधिकारी का इलाज जारी है और उनकी स्थिति पर चिकित्सकों की कड़ी निगरानी बनी हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, आगे की स्थिति मेडिकल रिपोर्ट और जांचों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


उत्तरायणी को केवल पर्व नहीं, बल्कि चेतना का उत्सव बताया जाता है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या देवभूमि में सच बोलना अब जोखिम बनता जा रहा है, और क्या इसका सबसे बड़ा बोझ महिलाओं को ही उठाना पड़ रहा है।


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