राजेश शुक्ला का बड़ा आरोप: सौरभ राज बेहड़ प्रकरण में रची गई साजिश, पुलिस की सक्रियता से खुला राज? किच्छा की राजनीति में बढ़ी हलचल।

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किच्छा/रुद्रपुर।किच्छा विधानसभा से पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं वर्तमान विधायक तिलक राज बेहड़ और उनके सुपुत्र सौरभ राज बेहड़ पर गंभीर आरोप लगाए। शुक्ला ने कहा कि हालिया सौरभ राज बेहड़ प्रकरण केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि एक संयोजित राजनीतिक साजिश थी, जिसका उद्देश्य उन्हें और वार्ड नंबर 39 के पार्षद प्रतिनिधि राधेश शर्मा को फंसाकर राजनीतिक रूप से बदनाम करना था।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


प्रेस वार्ता में राजेश शुक्ला ने कहा कि यदि पुलिस समय रहते सक्रियता नहीं दिखाती, तो यह साजिश अपने उद्देश्य में सफल हो सकती थी और निर्दोष लोगों का राजनीतिक भविष्य हमेशा के लिए दांव पर लग जाता।
आवास विकास पुलिस चौकी की घटना बनी साजिश का केंद्र
राजेश शुक्ला ने बताया कि कुछ दिन पूर्व आवास विकास पुलिस चौकी में वार्ड नंबर 39 के पार्षद प्रतिनिधि राधेश शर्मा और विधायक तिलक राज बेहड़ के पुत्र सौरभ राज बेहड़ आमने-सामने आए थे। यह घटना बाद में मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बनी।
शुक्ला के अनुसार, इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर एक ऐसा माहौल तैयार किया गया, जिससे यह प्रतीत हो कि राधेश शर्मा और उनसे जुड़े लोग किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट थी।
अस्पताल तक पहुंचा मामला, बढ़ा राजनीतिक तनाव
प्रेस वार्ता में बताया गया कि घटना के बाद पूरा प्रकरण अस्पताल तक पहुंचा, जहां हालात को जानबूझकर नाटकीय रूप देने की कोशिश की गई। अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों, सोशल मीडिया पर फैलाए गए संदेशों और अफवाहों के जरिए एकतरफा नैरेटिव गढ़ा गया।
मेरे भतीजो के घर पर पुलिस की दबी दी गई,राजेश शुक्ला ने कहा कि यह सब कुछ पूर्व नियोजित रणनीति के तहत किया गया, ताकि सहानुभूति हासिल कर राजनीतिक लाभ लिया जा सके और विरोधी पक्ष को कठघरे में खड़ा किया जा सके।
राधेश शर्मा को फंसाने की साजिश का दावा
राजेश शुक्ला ने स्पष्ट आरोप लगाते हुए कहा कि—
“राधेश शर्मा, जो बस्तियों में मजबूत पकड़ रखते हैं, उन्हें जानबूझकर इस प्रकरण में घसीटा गया। उद्देश्य साफ था—स्थानीय प्रभावशाली चेहरों को डराना और राजनीतिक संतुलन बिगाड़ना।”
उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में पार्षद प्रतिनिधि को अपराधी साबित करने की कोशिश की गई, जबकि जांच में सच्चाई कुछ और ही निकली।
पुलिस की सक्रियता से बेनकाब हुआ पूरा खेल
पूर्व विधायक ने पुलिस की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस की तत्पर और निष्पक्ष कार्रवाई ने पूरे षड्यंत्र को उजागर कर दिया। यदि पुलिस दबाव में आ जाती, तो स्थिति पूरी तरह अलग हो सकती थी।
“पुलिस ने समय रहते सच्चाई सामने लाई, इसी कारण आज राधेश शर्मा और मुझे राहत मिली है। यह लोकतंत्र के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है,” — राजेश शुक्ला।
तिलक राज बेहड़ पर सीधा हमला
प्रेस वार्ता में राजेश शुक्ला ने तिलक राज बेहड़ पर अप्रत्यक्ष नहीं, बल्कि सीधा राजनीतिक हमला किया। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ नेता और विधायक होने के नाते तिलक राज बेहड़ को अपने पद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए थी, लेकिन पुत्र मोह में राजनीतिक मर्यादाएं टूटती नजर आईं।
शुक्ला ने सवाल उठाया कि क्या सत्ता और प्रभाव का उपयोग कर सच्चाई को दबाने की कोशिश की गई?
किच्छा की राजनीति में बढ़ी हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद किच्छा विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां सत्ताधारी खेमे में असहजता देखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और स्थानीय राजनीति में नए समीकरण बनने लगे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में किच्छा की राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।

राजेश शुक्ला की प्रेस वार्ता ने सौरभ राज बेहड़ प्रकरण को नए सिरे से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे जांच किस दिशा में जाती है और क्या राजनीतिक जिम्मेदारी तय हो पाएगी, या यह मामला भी अन्य विवादों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा।


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