रोहित सिंह बनाम वास्तु शास्त्र: अधूरी विद्या, अंधविश्वास और करोड़ों की इमारत पर चला बुलडोज़र

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रुद्रपुर में सामने आया ताज़ा मामला केवल एक कारोबारी से हुई कथित ठगी भर नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक बीमारी का उदाहरण है, जहाँ अधूरी विद्या को पूर्ण विज्ञान बनाकर बेचा जा रहा है।
संस्कृत में कहा गया है—
“अल्पविद्यस्य हि जनस्य गर्वो भवति दुर्मतिः”
और रुद्रपुर का यह प्रकरण उसी श्लोक का जीवंत संस्करण बन गया है।
नैनीताल रोड स्थित मेट्रोपोलिस कॉलोनी निवासी कारोबारी रोहित सिंह ठाकुर करोड़ों की लागत से गंगापुर रोड पर एक भव्य प्ले-स्कूल का निर्माण करवा रहे थे। ठाकुर साहब के मन में शिक्षा का मंदिर बनाने का भाव था, लेकिन किसी ने उनके मन में वास्तु का कीड़ा डाल दिया।
बस फिर क्या था—किच्छा आवास विकास निवासी, स्वयंभू “वास्तु-विशारद” प्रमोद सिंह ज्योतिषाचार्य (स्वघोषित) की एंट्री हुई।
कहते हैं न, जहाँ श्रद्धा हो, वहाँ ठेकेदार पहले पहुँचता है।
आर्किटेक्ट भी “अधिकृत” मिला, नक्शा भी “शास्त्रसम्मत” बताया गया और ठाकुर साहब की जेब से अब तक करीब 10 लाख रुपये वास्तु-दक्षिणा के नाम पर उड़ गए।
लेकिन जैसे ही स्कूल के निर्माण को अन्य वास्तु विशेषज्ञों ने देखा, तो पता चला कि यहाँ तो वास्तु नहीं, वस्तु-विनाश हो रहा है।
अब हालत यह है कि करोड़ों की इमारत का हिस्सा तोड़ा जाएगा, काम ठप है और कारोबारी मानसिक अवसाद में चला गया


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