

रुद्रपुर न्यायालय में चन्द्रदेव मंदिर भूमि से जुड़ा वाद विचाराधीन, स्टे आदेश पर मांगी गई स्थिति स्पष्टता
रुद्रपुर। सिविल जज (प्रवर खण्ड) न्यायालय, रुद्रपुर में दीवानी वाद संख्या 252/2025 कान्ता प्रसाद गंगवार बनाम गेंदन लाल चन्द्रा आदि में वादी द्वारा न्यायालय से स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है। वाद मौहल्ला रम्पुरा, वार्ड संख्या 6/20 स्थित लगभग 120×125 फुट के भूखण्ड से संबंधित है, जहां चन्द्रदेव मंदिर, मां काली मंदिर, भैरव बाबा मंदिर एवं अन्य कमरे निर्मित हैं।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
वादी ने न्यायालय से यह भी स्पष्ट करने का अनुरोध किया है कि क्या 04 अक्टूबर 2025 को पारित अस्थायी निषेधाज्ञा (स्टे) आदेश को अग्रिम तिथि 15 दिसंबर 2025 तक प्रभावी किया गया है। मामले में अगली सुनवाई 15 दिसंबर 2025 को निर्धारित है।
रुद्रपुर। सिविल जज (सी.डी.), रुद्रपुर की अदालत ने मौहल्ला रम्पुरा स्थित मंदिर परिसर से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए प्रतिवादियों को किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप, कब्जे या निर्माण से रोक दिया है। यह आदेश मूल वाद संख्या 952/2025 में श्री कान्ता प्रसाद गंगवार बनाम श्री गेंदन लाल एवं अन्य के प्रकरण में पारित किया गया।
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
वादी पक्ष की ओर से बताया गया कि वादी ‘भाईचारा एकता मंच ट्रस्ट’ (रजिस्टर्ड) के अध्यक्ष हैं, जो पिछले लगभग 30 वर्षों से वार्ड नंबर 6/20 स्थित लगभग 120×125 फीट भूखंड पर काबिज हैं। इसी भूखंड पर चंद्रदेव मंदिर, मां काली मंदिर और भैरव बाबा मंदिर का निर्माण ट्रस्ट की ओर से कराया गया है। मंदिर की पूजा-अर्चना के लिए पुजारी भी नियुक्त है। इस भूमि पर वर्ष 2012 में विद्युत कनेक्शन लिया गया तथा उसी वर्ष से गृहकर भी नियमित रूप से अदा किया जा रहा है।
वादी ने आरोप लगाया कि 18 सितंबर 2025 और 28 सितंबर 2025 को प्रतिवादीगण द्वारा जबरन तारबाड़ कर कब्जा करने का प्रयास किया गया तथा पुनः कब्जे की धमकी दी गई। इसके समर्थन में वादी ने राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट, तहसीलदार की पुष्टि, विद्युत विभाग व गृहकर की रसीदें तथा ट्रस्ट के पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत किए।
न्यायालय ने प्रार्थनापत्र पर प्रथम दृष्टया सुनवाई के बाद माना कि विवादित संपत्ति पर वादी का हित प्रतीत होता है। यदि इस स्तर पर कोई आदेश नहीं दिया जाता तो वाद का उद्देश्य विफल हो सकता है।
अदालत का स्पष्ट आदेश अदालत ने प्रतिवादीगण, उनके नौकर-चाकर, रिश्तेदार व एजेंटों को आदेशित किया है कि वे वादी के शांतिपूर्ण कब्जे में किसी भी प्रकार का अवैध हस्तक्षेप न करें, जबरन कब्जा न करें, किसी तीसरे पक्ष का हित सृजित न करें, भूमि को नुकसान न पहुंचाएं, मंदिर संचालन में बाधा न डालें तथा किसी प्रकार का निर्माण या तारबाड़ कर रास्ता अवरुद्ध न करें।
साथ ही वादी को निर्देश दिए गए हैं कि वह वादपत्र व सभी दस्तावेजों की सत्यापित प्रतियां प्रतिवादियों को तत्काल भेजें और आदेश 39 नियम 3 सीपीसी का अनुपालन सुनिश्चित करें।
अगली सुनवाई के लिए आपत्ति/जवाब दाखिल करने की तिथि 14 अक्टूबर 2025 निर्धारित की गई है।
यह आदेश 4 अक्टूबर 2025 को प्रभारी सिविल जज (सी.डी.) रुद्रपुर, श्री हेमंत सिंह द्वारा पारित किया गया।




