नवरात्रि के दौरान संधिकाल में संधि पूजा का विशेष महत्व होता है। यह पूजा अष्टमी तिथि के समाप्त होने और नवमी तिथि के शुरू होने पर किया जाता है। दरअसल अष्टमी तिथि के आखिरी 24 मिनट और नवमी के पहले 24 मिनट को संधिकाल कहा जाता है।

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इस पूजा में 108 मिट्टी के दिए, 108 कमल के फूल के अलावा एक लाल साबुत फल, लाल गुड़हल के फूल, साड़ी, कच्चे चावल के दाने, बेल पत्ते का प्रयोग किया जाता है। पूजा के दौरान मां दुर्गा को 108 लाल गुड़हल के फूलों की और 108 बेल के पत्तों से बनी दो मालाएं पहनाई जाती हैं। तो आइए जानते हैं कि चैत्र संधि पूजा का शुभ मुहूर्त कितने बजे से आरंभ और कितने बजे समाप्त होगा।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

चैत्र संधि पूजा 2026 मुहूर्त

चैत्र संधि पूजा 26 मार्च 2026 को किया जाएगा। चैत्र शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 25 मार्च को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट पर हो चुका है। चैत्र अष्टमी तिथि का समापन 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर होगा। चैत्र संधि पूजा मुहूर्त सुबह 11 बजकर 24 मिनट से दोपहर 12 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। चैत्र संधि पूजा के लिए करीब 48 मिनट का समय मिलेगा।

संधि पूजा महत्व

नवरात्रि पूजा के समय सन्धि पूजा का विशेष महत्व होता है। अष्टमी तिथि की समाप्ति और नवमी तिथि का आरंभ हो रहा हो, उस मुहूर्त में संधि पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस मुहूर्त में, देवी चामुंडा, चंड और मुंड नामक दो राक्षसों का वध करने के लिए प्रकट हुई थी। संधि पूजा का मुहूर्त दो घटी के लिए रहता है, जो कि लगभग 48 मिनट का समय होता है। संधि पूजा मुहूर्त का योग दिन में किसी भी समय बन सकता है और संधि पूजा मात्र उस समय काल में ही की जानी चाहिए।

संधि पूजा को शक्ति की उपासना के लिए सबसे उत्तम समय माना गया है। इस दौरान भक्तों की प्रार्थनाएं और साधनाएं शीघ्र फलदायी होती हैं। संधि पूजा केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मां दुर्गा के अद्भुत पराक्रम और उनके रक्षक स्वरूप की स्मृति है। यह हमें संदेश देती है कि अंधकार और अन्याय पर अंततः धर्म और प्रकाश की ही विजय होती है।

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