

नैनीडांडा (पौड़ी), 24 फरवरी 2026।
लैंसडाउन विधानसभा के अंतर्गत ग्राम नौनियाखेत में आज हिमालय क्रांति पार्टी के क्रांतिवीर नेता लाल सिंह बिष्ट ने दुर्गम पहाड़ी रास्तों को पार करते हुए घर-घर जनसंपर्क पदयात्रा की। यह यात्रा केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि पहाड़ की वास्तविक परिस्थितियों को समझने और जनता से सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास रही।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
नौनियाखेत तक पहुंचना आसान नहीं था। सड़क से लगभग 5-6 किलोमीटर नीचे उतराई और फिर करीब 6 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पैदल तय करनी पड़ी। जंगली जानवरों के भय और कठिन रास्तों के बीच यह पदयात्रा पहाड़ के गांवों की बदहाल स्थिति की जीवंत तस्वीर बनकर सामने आई।
गांव की जमीनी समस्याएं उजागर
जनसंपर्क के दौरान ग्रामीणों ने अपनी मूलभूत समस्याओं को खुलकर रखा। प्रमुख समस्याओं में शामिल हैं—
पीने के पानी की गंभीर कमी
सड़क से 5-6 किलोमीटर की दूरी, जिससे आवागमन में भारी दिक्कत
जंगली जानवरों का बढ़ता आतंक
ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से ये समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों का ध्यान केवल चुनाव के समय ही गांव की ओर जाता है।
“विकास की सबसे बड़ी बाधा भ्रष्टाचार”
इस अवसर पर लाल सिंह बिष्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गांवों के विकास में सबसे बड़ी रुकावट भ्रष्टाचार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक निधि में भी 40 से 60 प्रतिशत तक कमीशनखोरी हो रही है, ऐसे में शेष राशि से गुणवत्तापूर्ण विकास कार्य संभव ही नहीं।
उन्होंने ग्रामीणों के बीच संकल्प लेते हुए कहा—
“यदि जनता नेतृत्व का अवसर देती है तो विधायक निधि में कमीशन की प्रथा तुरंत समाप्त की जाएगी। जब विधायक स्वयं ईमानदार होगा तो ब्लॉक स्तर पर होने वाली कमीशनखोरी भी रुकवाना संभव होगा। व्यवस्था को वही व्यक्ति ईमानदार बना सकता है, जो स्वयं ईमानदार हो।”
ग्रामीणों का समर्थन और परिवर्तन की मांग
लाल सिंह बिष्ट के स्पष्ट और निर्भीक वक्तव्य का गांववासियों ने स्वागत किया। कई ग्रामीणों ने कहा कि पहाड़ की असली समस्या संसाधनों की कमी नहीं बल्कि पारदर्शिता की कमी है। उन्होंने परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर देते हुए ईमानदार नेतृत्व का समर्थन जताया।
पदयात्रा के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने “कमीशनखोरी नहीं, विकास चाहिए” और “भ्रष्टाचार मुक्त, सुविधायुक्त प्रदेश” जैसे नारों के साथ जनजागरण का संदेश दिया।
राजनीतिक संदेश स्पष्ट
यह पदयात्रा लैंसडाउन विधानसभा में आगामी चुनावी समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचकर जनसंपर्क करना यह संकेत देता है कि पहाड़ के दूरस्थ गांव अब राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाए जा रहे हैं।
नौनियाखेत की पगडंडियों पर गूंजा यह संदेश साफ है—
अब गांव केवल वादों से नहीं, ईमानदार नीतियों और पारदर्शी नेतृत्व से विकास चाहता है।




