

रुद्रपुर ,हिमाद्री जन सेवा समिति (रजि०) कार्यक्रम में उपस्थित स्टॉल लगाकर ,समाज की असली पहचान उसके सबसे कमजोर वर्ग के प्रति उसके व्यवहार से होती है। जब बात दिव्यांग बच्चों की आती है, तो जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। ऐसे बच्चों को केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि सही दिशा, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आत्मसम्मान की आवश्यकता होती है। इसी सोच को साकार रूप देने का कार्य कर रही है सारथी दिव्यांग कल्याण समिति, जो रुद्रपुर की सिंह कॉलोनी, गली नंबर–3 में दिव्यांग बच्चों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
“सारथी” – नाम नहीं, एक संकल्प
महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन के सारथी बने थे—मार्गदर्शक, रक्षक और प्रेरक। उसी भाव को आत्मसात करते हुए सारथी दिव्यांग कल्याण समिति दिव्यांग बच्चों के जीवन रथ की सारथी बनकर उन्हें आत्मनिर्भर, शिक्षित और सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की अपील
हिमाद्री सेवा समिति के सांस्कृतिक आयोजन में सारथी दिव्यांग कल्याण समिति द्वारा लगाया गया जागरूकता स्टॉल समाज को आईना दिखाने वाला प्रयास है। जब हम मंचों पर संस्कृत मंत्र सजाते हैं, बड़े-बड़े काव्य और प्रवचन करते हैं, तब यह भी हमारा नैतिक दायित्व है कि समाज की मुख्य धारा में खड़े लोग ऐसे जमीनी कार्यों को सहयोग दें। दिव्यांग बच्चे दया नहीं, अवसर चाहते हैं। उनका भविष्य हमारी सामूहिक संवेदनशीलता पर निर्भर है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स समाज, जनप्रतिनिधियों और समर्थ वर्ग से अपील करता है कि वे आगे आएं, सहयोग करें और इन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के सारथी बनें।
दिव्यांगता: अभिशाप नहीं, एक अलग क्षमता
आज भी समाज में दिव्यांगता को कमजोरी समझा जाता है, जबकि सच्चाई यह है कि सही प्रशिक्षण और वातावरण मिलने पर दिव्यांग बच्चे असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। जरूरत है तो बस उन्हें समझने, स्वीकारने और अवसर देने की। सारथी समिति इसी सोच के साथ कार्य कर रही है—जहां हर बच्चा “बोझ” नहीं, बल्कि “संभावना” है।
समिति द्वारा उपलब्ध प्रमुख सुविधाएं
1. शिक्षा एवं काउंसलिंग की समर्पित व्यवस्था
सारथी समिति में दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षा की व्यवस्था की गई है। यहां पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि
व्यवहारिक ज्ञान
जीवन कौशल
आत्मविश्वास बढ़ाने वाली गतिविधियां
अभिभावकों के लिए काउंसलिंग
भी नियमित रूप से कराई जाती हैं। इससे बच्चों के साथ-साथ माता-पिता को भी मानसिक संबल मिलता है।
2. गतिविधि आधारित परीक्षण (Activity Based Assessment)
हर दिव्यांग बच्चा अलग होता है—उसकी क्षमता, उसकी गति और उसकी समझ। इसी कारण समिति में बच्चों का गतिविधि आधारित परीक्षण किया जाता है, जिससे यह जाना जा सके कि बच्चा किस क्षेत्र में बेहतर कर सकता है। इसी आधार पर उसकी आगे की शिक्षा और प्रशिक्षण तय किया जाता है।
3. बच्चों की संपूर्ण देखभाल
सारथी समिति बच्चों की केवल शिक्षा नहीं, बल्कि
भावनात्मक
मानसिक
सामाजिक
देखभाल भी करती है। यहां बच्चों को एक सुरक्षित, प्रेमपूर्ण और अनुशासित वातावरण मिलता है, जिससे वे खुलकर सीख सकें और आगे बढ़ सकें।
4. नियमित मेडिकल चेकअप एवं स्वास्थ्य शिविर
दिव्यांग बच्चों के लिए स्वास्थ्य जांच अत्यंत आवश्यक है। समिति समय-समय पर
मेडिकल चेकअप
विशेषज्ञ डॉक्टरों के शिविर
फिजियोथेरेपी परामर्श
का आयोजन करती है, जिससे बच्चों की सेहत पर निरंतर नजर रखी जा सके।
5. घर से लाने-ले जाने की वाहन सुविधा (नैनी सहित)
रुद्रपुर ,हिमाद्री जन सेवा समिति द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में मुख्य रूप से सांसद अजय भट्ट,
कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा,
विधायक शिव अरोड़ा, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, सीएमओ रुद्रपुर के,के अग्रवाल,भारतीय जनता पार्टी वरिष्ठ नेता अमित नारंग,पूर्व महानिदेशकउत्तराखंड (स्वास्थ्य) डॉ. अमिता उप्रेती, कमलेंद्र सेमवाल,मोहिनी बिष्ट,
भाजपा नेता भारत भूषण चुघ, बंगाली कल्याण समिति के अध्यक्ष दिलीप अधिकारी, ममता त्रिपाठी, दीपा मटेला,
सुरेश कोहली, जमील अहमद, डॉ शाह खान थे।
कई अभिभावकों के लिए सबसे बड़ी समस्या बच्चों को केंद्र तक लाना-ले जाना होती है। इस समस्या को समझते हुए सारथी समिति ने
वाहन व्यवस्था
प्रशिक्षित नैनी के साथ
सुरक्षित पिक-अप और ड्रॉप
की सुविधा उपलब्ध कराई है। इससे अभिभावकों का भरोसा और बच्चों की सुरक्षा—दोनों सुनिश्चित होती हैं।
6. योग एवं व्यायाम कक्षाएं
योग और व्यायाम दिव्यांग बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। समिति में
विशेष योग सत्र
हल्के व्यायाम
संतुलन और लचीलापन बढ़ाने वाली गतिविधियां
कराई जाती हैं, जिससे बच्चों की कार्यक्षमता में सुधार होता है।
समाज के लिए सारथी समिति का महत्व
1. अभिभावकों का मानसिक संबल
दिव्यांग बच्चे के माता-पिता अक्सर खुद को अकेला महसूस करते हैं। सारथी समिति उन्हें यह एहसास दिलाती है कि वे अकेले नहीं हैं।
2. समावेशी समाज की दिशा में कदम
जब दिव्यांग बच्चों को समान अवसर मिलते हैं, तब समाज अधिक संवेदनशील और समावेशी बनता है।
3. आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भविष्य
सही मार्गदर्शन मिलने पर ये बच्चे आगे चलकर
स्वरोजगार
कला
खेल
तकनीकी कार्य
में अपनी पहचान बना सकते हैं।
समिति को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम
1. समाज की भागीदारी
स्थानीय नागरिक, सामाजिक संगठन, व्यापारी और युवा वर्ग—सभी को आगे आकर सहयोग करना होगा।
2. सरकारी योजनाओं से जोड़ाव
दिव्यांग कल्याण से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ बच्चों तक पहुंचाने के लिए समन्वय आवश्यक है।
3. जनजागरूकता अभियान
दिव्यांगता को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने हेतु
जागरूकता शिविर
स्कूलों में संवाद
सामाजिक कार्यक्रम
आयोजित किए जाने चाहिए।
4. स्वयंसेवकों की भूमिका
समाज के शिक्षित युवा यदि सप्ताह में कुछ घंटे भी सेवा दें, तो यह समिति के लिए बड़ा संबल बन सकता है।
एक अपील: एक बार जरूर संपर्क करें
यदि आपके आसपास कोई दिव्यांग बच्चा है, या आप किसी ऐसे परिवार को जानते हैं जिसे मार्गदर्शन की आवश्यकता है, तो एक बार सारथी दिव्यांग कल्याण समिति से अवश्य संपर्क करें। हो सकता है, यही संपर्क उस बच्चे के जीवन की दिशा बदल दे।
पता:
Sarathi Disabled Welfare Society
Singh Colony, Gali No. 3, Rudrapur
Udham Singh Nagar, Uttarakhand
फोन नंबर:
8218792883
8219553281
सारथी दिव्यांग कल्याण समिति केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक आंदोलन है—दिव्यांग बच्चों को सम्मान, अवसर और भविष्य देने का आंदोलन। यदि समाज, प्रशासन और आम नागरिक मिलकर इसका साथ दें, तो वह दिन दूर नहीं जब ये बच्चे “दया के पात्र” नहीं, बल्कि “गर्व के प्रतीक” बनेंगे।
आइए, हम सब मिलकर इन नन्हे कदमों के लिए मजबूत राह बनें।
उपरोक्त कार्यक्रम में मुख्य रूप से संध्या सक्सेना ,दीपिका तोमर, प्रियंका ,अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह रावत, राजीव कुमार ,संजीव की उपस्थिति रही,




