सितारगंज। जीएसटी विभाग की विशेष जांच शाखा (एसआईबी) ने प्रदेश की सबसे बड़ी एकदिवसीय कार्रवाई करते हुए सितारगंज स्थित ट्रांसफॉर्मर व संबद्ध सेवाओं से जुड़े एक बड़े औद्योगिक समूह पर छापा मारकर 150 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी का पर्दाफाश किया है।

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कार्रवाई के दौरान करीब 19.83 करोड़ रुपये का जीएसटी मौके पर ही जमा कराया गया। हालांकि विभाग ने आधिकारिक रूप से कंपनी समूह और निदेशकों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन जांच एजेंसियों के अनुसार यह समूह 500 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाली कई कंपनियों का नेटवर्क है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

संबंधित इकाइयों और निदेशकों की भूमिका की गहन जांच जारी है। इस कार्रवाई का संचालन जीएसटी आयुक्त सोनिका सिंह (आईएएस) के नेतृत्व में किया गया। संयुक्त आयुक्त (विशेष जांच शाखा) रोशन लाल एवं जोनल अपर आयुक्त राकेश वर्मा के मार्गदर्शन में पूरी योजना तैयार की गई, जिसके तहत टीमों ने सुनियोजित तरीके से छापेमारी को अंजाम दिया।

8 घंटे चली कार्रवाई, 76 करोड़ का स्टॉक सीज

18 मार्च 2026 को एसआईबी की तीन टीमों ने फैक्ट्री परिसर में एक साथ छापेमारी की। करीब आठ घंटे तक चली इस कार्रवाई में बिक्री, स्टॉक, माल के आवागमन, खरीद और वित्तीय लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। फैक्ट्री में मौजूद करीब 76 करोड़ रुपये के स्टॉक को जांच के दायरे में लेकर सीज कर दिया गया है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक बिना विभाग की अनुमति इस माल को हटाया नहीं जा सकेगा।

‘निल’ रिटर्न दिखाकर चल रहा था करोड़ों का खेल

जांच में सामने आया कि कंपनी ने कुछ वर्ष पूर्व एनसीएलटी के माध्यम से डिमर्जर किया था। इसके बाद पुरानी कंपनी ने आधिकारिक तौर पर जेनसेट (जनरेटर) निर्माण और मेंटेनेंस का काम बंद दिखा दिया, जबकि नई कंपनी को यह काम सौंपा गया।इसके बावजूद पुरानी कंपनी देश के विभिन्न राज्यों तमिलनाडु, महाराष्ट्र, दमन-दीव आदि से लगातार कच्चा माल और तैयार सामान मंगाती रही। पिछले छह से सात महीनों में 150 करोड़ रुपये से अधिक का माल खरीदा गया, लेकिन जीएसटी पोर्टल पर लगातार ‘निल’ बिक्री दर्शाकर टैक्स देनदारी से बचा गया।

बैंक खातों और माल की आवाजाही से खुला राज

कंपनी के बैंक खातों में लगातार भारी लेनदेन हो रहे थे, जबकि कागजों में कारोबार शून्य दिखाया जा रहा था। जांच में पाया गया कि दक्षिण भारत से माल सितारगंज लाकर महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश भेजा जा रहा था।

सरकारी विभागों को सप्लाई, कागजों में हेराफेरी

ज्यादातर सप्लाई बिजली वितरण निगमों और ऊर्जा विभागों को टेंडर के माध्यम से की गई। जांच में कागजों में कीमत बढ़ाकर दिखाने के संकेत मिले हैं।
फैक्ट्री से बड़ी संख्या में फर्जी बिक्री बिल भी बरामद किए गए हैं। पिछले सात महीनों में कंपनी ने कोई जीएसटी जमा नहीं किया था।

एआई और आधुनिक तकनीक से खुलासा

इस पूरे मामले को उजागर करने में विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), एडवांस सॉफ्टवेयर और विभिन्न सरकारी डाटाबेस का सहारा लिया। अधिकारियों ने एक डमी कंपनी बनाकर भी जानकारी जुटाई। आरएफआईडी तकनीक और डेटा एनालिसिस के जरिए करीब एक महीने की लगातार जांच के बाद पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

इन संकेतों से हुआ शक

  • डिमर्जर के बाद भी संदिग्ध गतिविधियां
  • निदेशकों का बैकग्राउंड रियल एस्टेट से जुड़ा होना
  • कम समय में लंबी दूरी तक माल की ढुलाई
  • बैंक खातों में असामान्य लेनदेन
  • कागजी और वास्तविक स्टॉक में अंतर
  • माल परिवहन के वीडियो साक्ष्य

32 अधिकारियों की टीम ने की कार्रवाई

इस छापेमारी में 32 अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम शामिल रही, जिन्होंने तीन टीमों में बंटकर पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया। मौके पर ही 19.83 करोड़ रुपये का टैक्स जमा कराया गया, जो उत्तराखंड जीएसटी के इतिहास में एक दिन की सबसे बड़ी रिकवरी मानी जा रही है।

जांच जारी, नामों का खुलासा संभव

विभाग के अनुसार अभी जांच जारी है। आने वाले समय में कंपनी समूह और संबंधित निदेशकों के नाम आधिकारिक रूप से सामने आ सकते हैं। कर चोरी के अन्य पहलुओं की भी गहन जांच की जा रही है।

टीम में यह रहे शामिल

टीम में डिप्टी कमिश्नर राजनीश एस. यशवस्थी, ज्ञान चंद, सहायक आयुक्त दीपक कुमार, डॉ. रिंकन सिंह, आयुषी अग्रवाल, उज्ज्वल दलाकोटी सहित अन्य अधिकारी-तनुजा पांडे, भावना जोशी, पंकज आर्य, आकाश गुलिया, अश्विन कर्नवाल, कुंदन पांगती, कैलाश आर्य, प्रशांत शुक्ला, राम रहीस राणा, विनोद पंवार आदि शामिल रहे।


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