

पौड़ी गढ़वाल मुख्यालय में आयोजित हिमालय क्रांति पार्टी के प्रदेश स्तरीय सम्मेलन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि उत्तराखंड की आत्मा आज भी अपने मूल प्रश्नों—जल, जंगल, जमीन, पलायन, रोजगार और अस्मिता—को लेकर जागरूक है। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, वरिष्ठ पत्रकार एवं Hindustan Global Times के संपादक अवतार सिंह बिष्ट को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाना न केवल उनके संघर्षपूर्ण जीवन और पत्रकारिता की स्वीकार्यता है, बल्कि उत्तराखंड के जनपक्षीय मीडिया को दिया गया सम्मान भी है।
सम्मेलन का शुभारंभ पारंपरिक लोकसंस्कृति और वैचारिक उद्घोष के साथ हुआ। उत्तराखंड के लगभग सभी जिलों से प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही, वहीं दिल्ली प्रदेश से आए कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने यह संदेश दिया कि उत्तराखंड की पीड़ा केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि प्रवासी उत्तराखंडियों की चेतना में भी जीवित है।
राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर गंभीर मंथन
सम्मेलन में उत्तराखंड के जल संकट, पलायन, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, खनन, पर्यावरण संरक्षण और राजनीतिक ईमानदारी जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा हुई। वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि राज्य गठन के 25 वर्षों बाद भी मूल आंदोलनकारी भावनाओं की उपेक्षा की जा रही है। पहाड़ खाली हो रहे हैं, गांव बूढ़े हो रहे हैं और नीति-निर्माण मैदान केंद्रित होता जा रहा है।
मुख्य अतिथि अवतार सिंह बिष्ट ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड का संघर्ष केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि नीति और नीयत परिवर्तन का संघर्ष है। उन्होंने कहा—
“जब तक उत्तराखंड की समस्याओं को पहाड़ से देखकर नहीं समझा जाएगा, तब तक समाधान कागजों में ही सीमित रहेंगे।”
उन्होंने जल स्रोतों के निजीकरण, नदियों पर अनियंत्रित परियोजनाओं, और पारंपरिक जल संरचनाओं की अनदेखी पर गहरी चिंता जताई।
हिमालय क्रांति पार्टी को धन्यवाद और सराहना
मुख्य अतिथि के रूप में अवतार सिंह बिष्ट ने हिमालय क्रांति पार्टी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पार्टी सत्ता के गणित से अधिक सरोकारों की राजनीति कर रही है। उन्होंने पौड़ी गढ़वाल तथा दिल्ली प्रदेश से आए पार्टी के सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और आयोजकों को धन्यवाद प्रेषित किया और कहा कि ऐसे सम्मेलन लोकतंत्र की असली पाठशाला होते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आज जब राजनीतिक दल जनसंवाद से कटते जा रहे हैं, ऐसे में हिमालय क्रांति पार्टी द्वारा ग्रामीणों, समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों, एनजीओ प्रतिनिधियों और आम नागरिकों को मंच देना एक सकारात्मक पहल है।
जन-जन की आवाज़ बना मंच
सम्मेलन की विशेषता यह रही कि मंच केवल नेताओं तक सीमित नहीं रहा। ग्रामीण क्षेत्रों से आए नागरिकों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याएं सीधे मंच से रखीं। किसी ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर सवाल उठाए, तो किसी ने शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के अवसरों की कमी पर।
यह सम्मेलन एक राजनीतिक कार्यक्रम से अधिक जनसंवाद का जीवंत मंच बन गया, जहाँ उत्तराखंड की पीड़ा शब्दों में नहीं, अनुभवों में बोल रही थी।
Hindustan Global Times की प्रतिबद्ध पत्रकारिता
मुख्य अतिथि अवतार सिंह बिष्ट ने इस अवसर पर Hindustan Global Times की संपादकीय नीति और प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि—
“Hindustan Global Times ने हमेशा उत्तराखंड के दर्द, संघर्ष और सच्चाई को प्राथमिकता से प्रकाशित किया है, चाहे वह सरकार के पक्ष में हो या विपक्ष में—हम केवल सत्य के पक्ष में खड़े रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि जल, जंगल, जमीन, पलायन, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सामाजिक अन्याय जैसे मुद्दों पर प्रदेश स्तरीय ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी खबरें प्रमुखता से प्रकाशित की जाती रही हैं।
उत्तराखंड के कई उपेक्षित मुद्दे, जो मुख्यधारा मीडिया में स्थान नहीं पा सके, Hindustan Global Times के माध्यम से राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बने—यही इसकी सबसे बड़ी संपादकीय पूंजी है।
उत्तराखंड का नंबर वन न्यूज़ पोर्टल: विश्वास की पूंजी
आज Hindustan Global Times को उत्तराखंड के नंबर वन न्यूज़ पोर्टल के रूप में देखा जाता है, तो उसके पीछे कोई कॉर्पोरेट ताकत नहीं, बल्कि जनविश्वास है। यह पोर्टल न सत्ता का भोंपू बना, न विज्ञापन का गुलाम—बल्कि जनहित की संपत्ति बनकर उभरा है।
सम्मेलन में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखंड को ऐसे ही निर्भीक और सरोकार-केंद्रित मीडिया की आवश्यकता है, जो सवाल पूछे, जवाब मांगे और जनपक्ष में खड़ा रहे।
आभार और संकल्प
अंत में, अवतार सिंह बिष्ट ने पौड़ी गढ़वाल एवं दिल्ली प्रदेश से जुड़े हिमालय क्रांति पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और सम्मेलन में उपस्थित जनसमूह का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह संकल्प दोहराया कि Hindustan Global Times भविष्य में भी उत्तराखंड के ज्वलंत मुद्दों को पूरी ताकत और ईमानदारी के साथ उठाता रहेगा।
यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि उत्तराखंड आज भी जाग रहा है, और जब तक उसकी आवाज़ को मंच और कलम मिलती रहेगी, तब तक उसका संघर्ष जीवित रहेगा।





