

देहरादून/रुद्रपुर/हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के बाद उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने नकली दवाओं के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अभियान तेज कर दिया है। अब तक 12 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है, जिनमें दवा कंपनियों के मालिक और प्लांट संचालक भी शामिल हैं।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
एसटीएफ को इनपुट मिले हैं कि उत्तराखंड में एक और संगठित गिरोह सक्रिय है, जो नकली दवाओं की आपूर्ति कर रहा है। इस संबंध में अलग मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
1 जून 2025 को सेलाकुई क्षेत्र से आरोपित संतोष कुमार की गिरफ्तारी के साथ इस नेटवर्क का खुलासा हुआ था। उसके पास से नकली रैपर, आउटर बॉक्स, लेबल और क्यूआर कोड बरामद किए गए। इसके बाद एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए अब तक संतोष कुमार, नवीन बंसल, आदित्य काला, देवी दयाल गुप्ता, पंकज शर्मा, विजय कुमार पांडेय, प्रदीप गौड़, शिशिर सिंह, शैलेंद्र सिंह, तेजेंद्र कौर, प्रदीप कुमार और उसकी पत्नी श्रुति डावर को सलाखों के पीछे भेजा है।
उत्तराखंड से लेकर पड़ोसी राज्यों तक फैला नेटवर्क
नकली दवाओं का यह कारोबार उत्तराखंड तक सीमित नहीं है। यूपी, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में भी यह गिरोह सक्रिय हैं। कोई आरोपित दवा तैयार करता है तो कोई नकली रैपर, और इसके बाद इन्हें बाजार में उतारा जाता है।
जिला प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश
एसटीएफ की कार्रवाई के बाद यह साफ हो गया है कि नकली दवाओं का नेटवर्क छोटे-बड़े कस्बों तक फैला है। ऐसे में रुद्रपुर, हल्द्वानी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, खटीमा और ऊधमसिंह नगर में जिला प्रशासन को भी सतर्क रहने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग, दवा नियंत्रण प्राधिकरण और पुलिस की संयुक्त टीमें दवा दुकानों, थोक विक्रेताओं और गोदामों की नियमित जांच करें ताकि आम जनता के जीवन से खिलवाड़ न हो सके।
एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर ने कहा है कि कुछ और आरोपितों की जानकारी मिली है, जिन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। उन्होंने जनता से अपील की कि किसी भी संदिग्ध दवा या असामान्य लेन-देन की सूचना तत्काल पुलिस या प्रशासन को दें।




