

“जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया और जिला पूर्ति अधिकारी विनोद चन्द्र तिवारी की सख्ती से रुद्रपुर में गैस कालाबाजारी पर शिकंजा”

रुद्रपुर, 01 अप्रैल 2026। जनपद ऊधम सिंह नगर में घरेलू और व्यावसायिक गैस की आपूर्ति को लेकर लंबे समय से व्याप्त अव्यवस्था, कालाबाजारी और अवैध रिफिलिंग के खेल पर आखिरकार प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया और जिला पूर्ति अधिकारी विनोद चन्द्र तिवारी द्वारा की गई पहल न केवल सराहनीय है, बल्कि यह आम जनता के हित में एक निर्णायक कदम भी साबित हो सकती है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
जिला सभागार में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी द्वारा गैस एजेंसी प्रबंधकों को दिए गए स्पष्ट और कठोर निर्देश यह दर्शाते हैं कि अब प्रशासन किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। बिना गैस सिलेंडर की वास्तविक डिलीवरी के उपभोक्ताओं को फर्जी मैसेज भेजना, डिलीवरी में देरी करना या स्टॉक में गड़बड़ी करना—इन सभी पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। यहां तक कि एफआईआर दर्ज करने की बात भी कही गई, जो इस पूरे अभियान की गंभीरता को दर्शाती है।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की खबर का असर
यह वही मुद्दा है जिसे हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स ने पहले प्रमुखता से उठाया था। रुद्रपुर की गलियों और मोहल्लों में गैस की कालाबाजारी ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया था। रिपोर्ट में सामने आया था कि 3000 से 7000 रुपये तक में घरेलू सिलेंडर बेचे जा रहे थे, जबकि छोटे 5 लीटर के सिलेंडरों में 350 रुपये प्रति किलो तक गैस बेची जा रही थी।
नौकरी की तलाश में आए युवा, किराए पर रहने वाले परिवार और छोटे व्यापारी इस काले खेल के सबसे बड़े शिकार बने। गैस की कमी का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने “आपदा में अवसर” तलाशा और पूरे सिस्टम को चुनौती दे डाली। ऐसे में प्रशासन की यह कार्रवाई कहीं न कहीं मीडिया की जिम्मेदार पत्रकारिता का भी परिणाम है।
अवैध रिफिलिंग: एक साइलेंट बम
रुद्रपुर ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों—विशेषकर हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर—में गैस सिलेंडर फटने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इन घटनाओं के पीछे सबसे बड़ा कारण अवैध रिफिलिंग का कारोबार है।
हर गली-मोहल्ले में, हर दस घरों में से एक घर ऐसा मिल जाएगा जहां गैस की “रिपेयरिंग” या अवैध रिफिलिंग का काम हो रहा है। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि एक ऐसा खतरा भी है जो कभी भी बड़े हादसे का रूप ले सकता है।
अपने घर में सिलेंडर भरने वाला व्यक्ति केवल खुद के लिए नहीं, बल्कि अपने पूरे पड़ोस के लिए खतरा बन जाता है। एक छोटी सी चिंगारी कई जिंदगियों को खत्म कर सकती है। ऐसे में प्रशासन द्वारा इस मुद्दे को गंभीरता से लेना और कार्रवाई की चेतावनी देना वास्तव में समय की मांग है।
होम डिलीवरी सिस्टम: समाधान की कुंजी
जिलाधिकारी द्वारा दिया गया यह निर्देश कि किसी भी उपभोक्ता को गैस एजेंसी या गोदाम से सीधे सिलेंडर न दिया जाए और केवल होम डिलीवरी के माध्यम से ही वितरण हो—यह एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय है।
अगर इस व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए तो:
कालाबाजारी पर रोक लगेगी
फर्जी डिलीवरी का खेल खत्म होगा
उपभोक्ताओं को समय पर गैस मिलेगी
अवैध रिफिलिंग की जरूरत स्वतः समाप्त हो जाएगी
जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा नियमित स्टॉक जांच के निर्देश भी इस दिशा में एक मजबूत कदम हैं। आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च तक घरेलू गैस का दैनिक वितरण 11616 और अवशेष 9392 है, जबकि व्यावसायिक गैस का वितरण 404 और अवशेष 1366 है। ये आंकड़े बताते हैं कि गैस की उपलब्धता है, लेकिन वितरण प्रणाली में खामियां ही असली समस्या हैं।
कठोर कार्रवाई ही एकमात्र रास्ता
अब जरूरत है कि प्रशासन केवल निर्देश देने तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्रवाई भी सुनिश्चित करे।
हर मोहल्ले में छापेमारी हो
अवैध रिफिलिंग करने वालों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए
गैस एजेंसियों की जवाबदेही तय हो
उपभोक्ताओं की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई हो
जो लोग गैस की कालाबाजारी में लिप्त हैं, वे केवल कानून तोड़ने वाले नहीं, बल्कि समाज के लिए खतरा हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत इन पर कड़ी कार्रवाई होनी ही चाहिए।
जनता की भी जिम्मेदारी
इस पूरे मुद्दे में केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि आम जनता की भी जिम्मेदारी है।
अगर आपके आसपास:
कोई अवैध रिफिलिंग कर रहा है
गैस की कालाबाजारी हो रही है
फर्जी डिलीवरी का खेल चल रहा है
तो इसकी जानकारी देना आपका कर्तव्य है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स ने भी इस दिशा में पहल करते हुए लोगों से अपील की है कि वे ऐसी गतिविधियों की सूचना दें, ताकि उन्हें उजागर किया जा सके।
प्रशासनिक पहल: एक उम्मीद की किरण
जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया और जिला पूर्ति अधिकारी विनोद चन्द्र तिवारी की यह पहल निश्चित रूप से सराहनीय है। यह दिखाता है कि अगर प्रशासन चाहे, तो किसी भी समस्या का समाधान संभव है।
आज जरूरत है इस सख्ती को निरंतर बनाए रखने की। अगर यह अभियान लगातार चलता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब रुद्रपुर में गैस की कालाबाजारी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और हर घर तक पारदर्शी तरीके से गैस पहुंचेगी।
रुद्रपुर में गैस संकट केवल एक आपूर्ति समस्या नहीं थी, बल्कि यह एक संगठित अवैध तंत्र का परिणाम था। प्रशासन की सख्ती, मीडिया की सजगता और जनता की भागीदारी—इन तीनों के समन्वय से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।




