

इस युद्ध में उत्तराखंड के 248 रणबांकुरों ने बलिदान दिया था।

रण में दुश्मन से मोर्चा लेते हुए उत्तराखंड के 78 सैनिक घायल हुए। इन रणबांकुरों के अदम्य साहस का लोहा पूरी दुनिया ने माना। इस जंग में दुश्मन सेना से दो-दो हाथ करने वाले सूबे के 74 जांबाजों को वीरता पदक मिले थे।
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
शौर्य और साहस की यह गाथा आज भी भावी पीढ़ी में जोश भरती है। इतिहास गवाह है कि वर्ष 1971 में हुए युद्ध में दुश्मन सेना को नाकों चने चबवाने में उत्तराखंड के जवान पीछे नहीं रहे।
तत्कालीन सेनाध्यक्ष सैम मानेकशा (बाद में फील्ड मार्शल) और बांग्लादेश में पूर्वी कमान का नेतृत्व करने वाले सैन्य कमांडर ले. जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा ने भी प्रदेश के वीर जवानों के साहस को सलाम किया।
बलिदानियों की संख्या
- अल्मोड़ा-23
- बागेश्वर-24
- चंपावत-08
- चमोली-31
- देहरादून-42
- हरिद्वार-00
- लैंसडौन-19
- नैनीताल-12
- पौड़ी-19
- पिथौरागढ़-51
- रुद्रप्रयाग-01
- टिहरी-10
- ऊधम सिंह नगर-07
- उत्तरकाशी-01




