

सोमवार का दिन दिल्ली के सियासी गलियारों में भारी गहमागहमी भरा रहा। बंद दरवाजों के पीछे बैठकों का दौर चला, लेकिन नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ ही रहा। पहले विपक्ष के दिग्गजों ने स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और फिर कुछ ही देर बाद देश के गृह मंत्री अमित शाह ने स्पीकर के कक्ष में दस्तक दी। इस हाई-वोल्टेज ड्रामा के बीच राहुल गांधी की चार शर्तों ने सरकार और विपक्ष के बीच की खाई को और गहरा कर दिया है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
बंद कमरे में क्या हुआ?
सोमवार सुबह संसद भवन में एक अलग ही नजारा था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, टीएमसी के फायरब्रांड नेता अभिषेक बनर्जी और डीएमके के टीआर बालू स्पीकर ओम बिरला से मिलने पहुंचे। मकसद था सदन में चल रहे हंगामे को खत्म करना। लेकिन सूत्रों की मानें तो यह मुलाकात बेनतीजा रही। विपक्ष के जाने के कुछ ही देर बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पीकर से मुलाकात की। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि शाह की यह एंट्री विपक्ष की शर्तों पर सरकार का कड़ा रुख स्पष्ट करने के लिए थी।
राहुल की 4 शर्तें और सरकार का पलटवार
इस पूरे विवाद की जड़ में राहुल गांधी द्वारा रखी गई चार शर्तें हैं, जिन्हें सरकार ने मानने से लगभग इनकार कर दिया है। विपक्ष का पहला मुद्दा अपनी महिला सांसदों पर लगाए गए आरोपों को लेकर है। विपक्ष चाहता है कि ये आरोप वापस हों। लेकिन सरकार ने वीडियो फुटेज का हवाला देते हुए साफ कर दिया है कि महिला सांसद प्रधानमंत्री के आसन की ओर आक्रामक तरीके से बढ़ती हुई दिख रही हैं, इसलिए पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता।
दूसरा बड़ा पेंच आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन पर फंसा है। विपक्ष उनकी तत्काल वापसी चाहता है, जबकि सरकारी सूत्रों ने दो टूक कह दिया है कि जब तक गतिरोध नहीं सुलझता और सदन सुचारू रूप से नहीं चलता, निलंबन वापसी पर कोई चर्चा नहीं होगी। तीसरी शर्त बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे को लेकर थी। विपक्ष चाहता है कि दुबे को बोलने से रोका जाए, लेकिन सरकार का तर्क है कि चेयर ने उन्हें अनुमति नहीं दी थी और बाद में उनके भाषण के अंश हटा भी दिए गए थे। रही बात राहुल गांधी को बोलने देने की, तो सरकार का कहना है कि वे नियम के तहत बोल सकते हैं, लेकिन अगर वे फिर वही पुराना राग अलापेंगे तो सदन कैसे चलेगा?
विपक्ष के अपने घर में लगी आग
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की बात उठी। कांग्रेस चाहती थी कि स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ मोर्चा खोला जाए और अविश्वास प्रस्ताव लाया जाए। लेकिन इस मुद्दे पर अब ‘इंडिया’ गठबंधन में ही दरार पड़ती दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी की टीएमसी और शरद पवार की एनसीपी इस प्रस्ताव के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं। अधिकांश विपक्षी दल चाहते हैं कि सदन चले ताकि वे महंगाई और बेरोजगारी जैसे जनता के मुद्दों पर सरकार को घेर सकें। कांग्रेस इस मुद्दे पर अब अलग-थलग पड़ती नजर आ रही है। कुल मिलाकर, सोमवार की कवायद के बाद भी संसद का गतिरोध जस का तस बना हुआ है।




