

वहीं, बीते वर्ष 2024-25 में कर्ज का बोझ 83 हजार करोड़ रुपये था। इस तरह कर्ज में करीब 11 हजार करोड़ की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
उत्तराखंड पर कर्ज के बोझ की कहानी करीब नौ हजार करोड़ से शुरू हुई थी। इसके बाद वर्ष 2010-11 तक कर्ज ने द्रुत गति से कुलाचें भरीं। यहां तक कि वर्ष 2019-20 तक भी कर्ज में रह रहकर उछाल देखने को मिला।
इसके बाद बढ़ोतरी की रफ्तार में जरूर कुछ कमी आई है, लेकिन फिर भी इसके निरंतर ऊपर बढ़ने की दर ने प्रदेश को करीब 94 हजार करोड़ रुपये के बोझ तले दबा दिया है।
सचिव वित्त दिलीप जावलकर के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2020-21 के बाद कर्ज बढ़ने के अनुपात में निरंतर कमी आ रही है। वर्तमान में कर्ज की जो भी स्थिति है, वह एफआरबीएम एक्ट के सीमा के भीतर है। आने वाले समय मे भी कर्ज के इसी सीमा में रहने का अनुमान है।
उत्तराखंड पर कर्ज (वर्षवार)
- वित्तीय वर्ष, कुल कर्ज, बढ़ोतरी, वृद्धि (प्रतिशत में)
- 2011-12, 23609, – –
- 2012-13, 25540, 1931, 8.18%
- 2013-14, 28767, 3227, 12.63%
- 2014-15, 33480, 4713, 16.38%
- 2015-16, 39069, 5589, 16.69%
- 2016-17, 44583, 5514, 14.11%
- 2017-18, 51831, 7248, 16.26%
- 2018-19, 58039, 6208, 11.97%
- 2019-20, 65982, 7943, 13.68%
- 2020-21, 73751, 7769, 11.78%
- 2021-22, 77023, 3272, 4.44%
- 2022-23, 78509, 1486, 1.93%
- 2023-24, 85914, 7405, 9.43%
- 2024-25 (संशोधित अनुमान) 94666, 8752, 10.19%
- 2025-26 (बजट अनुमान), 99632, 4966, 5.25%
- 2026-27 (बजट अनुमान), 104245, 4613, 4.63%




