

यह दिन (Dev Deepawali 2025) विशेष रूप से भगवान विष्णु और भगवान शिव को समर्पित है।5 November 2025: बुधवार का दिन यानी 5 नवंबर 2025 का दिन अति शुभ और सकारात्मक है. बुधवार को गणेश जी की पूजा करने का विधान है. इस दिन जो भी भक्त गणेश जी की पूजा करते हैं उनके जीवन से दुखों का नाश होता है और काम में बाधा नहीं आती है.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
लेकिन कार्तिक महीने और पूर्णिमा तिथि का सीधा संबंध माता लक्ष्मी से भी है। इसलिए इस मौके पर दीपदान के बाद, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की आरती करना बहुत शुभ माना जाता है, तो आइए करते हैं।
जातक को बुध दोष से मुक्ति मिलती है और बुद्धि बढ़ती है. सूर्य देव की पूजा बुधवार के दिन करने से कुंडली में बुध की स्थिति मजबूत होती है. बुधवार का दिन बुध ग्रह से शुरू होता है जो वाणी, बुद्धि और व्यापार के कारक हैं. आइए 5 नवंबर 2025 का पूरा दैनिक पंचांग जान लें.
5 नवंबर 2025 का पंचांग शुभ मुहूर्त और नक्षत्र (5 November 2025 Aaj ka Panchang In Hindi)
5 नवंबर 2025 को तिथि- कार्तिक पूर्णिमा तिथि शाम 06:49 बजे तक, इसके बाद प्रतिपदा.
5 नवंबर 2025 को वार बुधवार है.
5 नवंबर 2025 को नक्षत्र अश्विनी सुबह 09:40 बजे तक, इसके बाद कृत्तिका नक्षत्र.
5 नवंबर 2025 को योग- सिद्धि योग सुबह 11:28 बजे तक, इसके बाद व्यातीपात योग.
5 नवंबर 2025 को करण- विष्टि सुबह 08:44 बजे तक. शाम 06:49 बजे तक बव, बालव सुबह 04:52 बजे तक. इसके बाद कौलव.
नवंबर 2025 को सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
5 नवंबर 2025 को सूर्योदय सुबह 06:38 बजे.
5 नवंबर 2025 को सूर्यास्त शाम को 05:42 बजे.
5 नवंबर 2025 को चंद्रोदय दोपहर को 05:27 बजे.
6 नवंबर 2025 को चंद्रस्त सुबह को 07:15 बजे.
5 नवंबर 2025 को सूर्य तुला राशि में गोचर.
5 नवंबर 2025 को मेष राशि में संचरण.
(शहर के हिसाब से उदय और अस्त के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है)
5 नवंबर 2025 को व्रत त्योहार
5 नवंबर 2025 को कार्तिक पूर्णिमा पर्व है.
5 नवंबर 2025 को देव दिवाली पर्व है.
5 नवंबर 2025 को गुरु नानक जयंती पर्व है.
5 नवंबर 2025 को भीष्म पंचक समाप्त हो रहा है.
5 नवंबर 2025 को शुभ मुहूर्त
5 नवंबर 2025 को अभिजीत मुहूर्त- —
5 नवंबर 2025 को ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05:02 से लेकर सुबह 05:50 बजे तक
5 नवंबर 2025 को अमृत काल- रात 02:22 से लेकर सुबह 03:45 बजे तक.
राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)
5 नवंबर 2025 को अशुभ मुहूर्त
5 नवंबर 2025 को राहूकाल- दोपहर 12:10 से लेकर दोपहर 01:33 बजे तक
5 नवंबर 2025 को यम गण्ड- सुबह 08:01 से लेकर सुबह 09:24 बजे तक.
5 नवंबर 2025 को कुलिक- सुबह 10:47 से लेकर दोपहर 12:10 बजे तक.
5 नवंबर 2025 को दुर्मुहूर्त- सुबह 11:48 से लेकर दोपहर 12:32 बजे तक.
5 नवंबर 2025 को वर्ज्यम्- सुबह 06:08 से लेकर सुबह 07:32 बजे तक. शाम 06:01 से लेकर शाम 07:25 बजे तक.
भगवान विष्णु की आरती।।
ॐ जय जगदीश हरे आरती
ॐ जय जगदीश हरे…
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे…
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे…
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे…
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे…
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे…
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे…
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे…
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे…
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे…
॥आरती श्री लक्ष्मी जी॥
ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत,हरि विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी,तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत,नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रुप निरंजनी,सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत,ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं,सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता,मन नहीं घबराता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते,वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर,क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,कोई नहीं पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता,पाप उतर जाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
गणेश जी की आरती
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥




