सावन का महीना भगवान शिव को सबसे प्रिय माना जाता है। इस पवित्र दिन पर लाखों श्रद्धालु मंदिरों में जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और भक्ति में लीन हैं। सावन के पहले सोमवार (14 जुलाई 2025) को देशभर के शिव मंदिरों में भोलेनाथ के भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है।

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वाराणसी में काशी विश्वनाथ से लेकर देवघर के बाबा बैद्यनाथ, हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव से मुंबई के बाबुलनाथ मंदिर तक, हर जगह ‘हर-हर महादेव’ की गूँज सुनाई दे रही है।

सावन का महीना भगवान शिव को सबसे प्रिय माना जाता है, और इस पवित्र दिन पर लाखों श्रद्धालु मंदिरों में जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और भक्ति में लीन हैं। मंदिरों को फूलों, रंग-बिरंगी झालरों और दीयों से सजाया गया है और भजनों की मधुर धुनों से वातावरण भक्तिमय हो गया है। देश भर में सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए हैं। ड्रोन से लेकर हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।

काशी विश्वनाथ में भक्ति का अनूठा संगम

वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन के पहले सोमवार को सुबह मंगला आरती के साथ ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस बार प्रोटोकॉल दर्शन पर पूरी तरह रोक लगाई गई है, ताकि सभी भक्तों को समान रूप से दर्शन का मौका मिले। मंदिर के गर्भगृह में केवल 21 यादव बंधुओं को प्रवेश की अनुमति दी गई है।

सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं, और गंगा जल, बेलपत्र, दूध, और धतूरा चढ़ाकर भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने में जुटे हैं। मंदिर परिसर में सुरक्षा के लिए ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है, और पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है। वहीं, प्रशासन ने शिवभक्तों पर फूल भी बरसाए।


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