ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध ने भारत की रसोई तक अपनी तपिश पहुँचा दी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण गैस की आपूर्ति बाधित हुई है। इस संकट से निपटने के लिए भारत सरकार एक क्रांतिकारी बदलाव पर विचार कर रही है।

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अब आपको 14.2 किलो के भारी-भरकम सिलेंडर के बजाय कम वजन वाले सिलेंडर से काम चलाना पड़ सकता है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

वजन कम, दाम भी कम पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यदि आपूर्ति की स्थिति और बिगड़ती है, तो घरेलू सिलेंडरों में 14.2 किलो के बजाय केवल 7 या 10 किलो गैस भरी जाएगी। वहीं, 10 किलो वाले फाइबर सिलेंडरों में सिर्फ 5 किलो गैस ही दी जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्राहकों को केवल उतने ही वजन के पैसे देने होंगे जितनी गैस सिलेंडर में होगी। हालांकि, बुकिंग के नियमों में कोई ढील नहीं दी गई है; शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन का अंतराल बना रहेगा।

कमर्शियल गैस की बढ़ी सप्लाई सरकार ने वाणिज्यिक (Commercial) उपभोक्ताओं जैसे रेस्तरां, ढाबों और उद्योगों के लिए गैस का कोटा 20% बढ़ाकर कुल 50% कर दिया है। इसका उद्देश्य खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को टूटने से बचाना है। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि रसोई गैस के दामों में एक बार फिर बढ़ोतरी हो सकती है।

अमेरिका से मिली संजीवनी मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करने के लिए भारत अब अमेरिका से गैस मंगा रहा है। रविवार सुबह टेक्सास से ‘पिक्सिस पायनियर’ नामक जहाज मैंगलोर बंदरगाह पहुँच चुका है। इसके अलावा, 25 और 29 मार्च को दो और बड़े जहाज भारत पहुँचने वाले हैं, जो देश की गैस जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि युद्ध के इस दौर में भी देश के घरों में चूल्हा जलता रहे।


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